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Thursday, March 30, 2017

फिल्‍म समीक्षा : नाम शबाना



फिल्‍म रिव्‍यू
दमदार एक्‍शन
नाम शबाना
-अजय ब्रह्मात्‍मज

नीरज पांडेय निर्देशित बेबी में शबाना(तापसी पन्‍नू) ने चंद दृश्‍यों में ही अपनी छोटी भूमिका से सभी को प्रभावित किया था। तब ऐसा लगा था कि नीरज पांडेय ने फिल्‍म को चुस्‍त रखने के चक्‍कर में शबाना के चरित्र विस्‍तार में नहीं गए थे। हिंदी में स्पिन ऑफ की यह अनोखी कोशिश है। फिल्‍म के एक किरदार के बैकग्राउंड में जाना और उसे कहानी के केंद्र में ले आना। इस शैली में चर्चित फिल्‍मों के चर्चित किरदारों के विस्‍तार में जाने लगें तो कुछ दिलचस्‍प फिल्‍में मिल सकती हैं। किरदारों की तैयारी में कलाकार उसकी पृष्‍ठभूमि के बारे में जानने की कोशिश करते हैं। अगर लेखक-निर्देशक से मदद नहीं मिलती तो वे खुद से उसका अतीत गढ़ लेते हैं। यह जानना रोचक होगा कि क्‍या नीरज पांडेय ने तापसी पन्‍नू को शबाना की पृष्‍ठभूमि के बारे में यही सब बताया था,जो नाम शबाना में है?
नाम शबाना के केंद्र में शबाना हैं। तापसी पन्‍नू को टायटल रोल मिला है। युवा अभिनेत्री तापसी पननू के लिए यह बेहतरीन मौका है। उन्‍होंने लेखक नीरज पांढेय और निर्देशक शिवम नायर की सोच के मुताबिक शबाना को विदाउट मुस्‍कान सख्‍तजान किरदार के रूप में पेश किया है। वह नो नॉनसेंस मिजाज की लड़की है। जिंदगी के कटु अनुभवों ने उसकी मुस्‍कान छीन ली है। सहज इमोशन में भी वह असहज हो जाती है। यहां तक कि अपने प्रेमी तक को नहीं बता पाती कि वह उससे उतना ही प्‍यार करती है। सब कुछ तेजी से घटता है। वह अपने एटीट्यूड की वजह से सुरक्षा एजेंसी की नजर में आ जाती है। वे उसकी मदद करते हैं और बदले में उसका गुस्‍सा और जोश ले लेते हैं।
सुरक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली बहस का विषय हो सकती है। सुरक्षा एजेंसी के अधिकारी स्‍पष्‍ट शब्‍दों में बता देते हैं कि मुस्लिम परिवेश की होने की वजह से शबाना उनके लिए अधिक काम की है। जाहिर है कि मजहब,नाराजगी और प्रतिरोध का फायदा दोनों पक्ष उठाते हैं आतंकवादी और राष्‍ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां। नीरज पांडेय के लेखन में राष्‍ट्रवादी सोच कील झलक रहती है। उनके किरदार देशहित में लगे रहते हैं। वे पुरानी फिल्‍मों के किरदारों की तरह देशभक्ति ओड़ कर नहीं चलते। इसी फिल्‍म में शबाना किडो में इंअरनेशनल अवाड्र लाना चाहती है।
तापसी पन्‍नू फिल्‍म दर फिल्‍म निखरती जा रही हैं। उन्‍हें दमदार भमिकाएं मिल रही हैं और वह किरदारों के अनुरूप खुद को ढाल रही हैं। किरदारों की बारीकियों को वह पर्दे पर ले आती हैं। उनके एक्‍सप्रेशन संतुलित और किरदार के मिजाज में होते हैं। नाम शबाना में उन्‍होंने किरदार की स्‍फूर्ति और हिम्‍मत बनाए रखी है। मनोज बाजपेयी कर्मठ व निर्मम अधिकारी के रूप में जंचे हैं। वे सचमुच बहुरूपिया हैं। जैसा किरदार,वैसी भाव-भंगिमा। उनके पोर-पोर से संजलीदगी टपकती है। अक्षय कुमार ने फिल्‍म की जरूरत के मुताबिक छोटी भूमिका निभाई है,जिसे कैमियो कहा जाता है। लंगे समय के बाद वीरेन्‍द्र सक्‍सेना दिखे और सही लगे।
फिल्‍म में एक ही कमी है कहानी। अगर नीरज पांडेय ने थोड़ा और ध्‍यान दिया होता तो एक बेहतरीन फिल्‍म मिलती। निर्देशक शिवम नायर ने मिली हुई स्क्रिप्‍ट के साथ न्‍याय किया है। उन्‍होंने एक्‍शन,माहौल और प्रस्‍तुति में कोई कोताही नहीं की है। नाम शबाना का एक्‍शन जमीनी और आमने-सामने का है। एक्‍शन में खास कर महिला किरदार के होने की वजह से फिल्‍म अलग हो गई है। तापसी पन्‍नू इस भूमिका में प्रभावित करती हैं।
अवधि 148 मिनट
*** तीन स्‍टार    

Thursday, March 23, 2017

कहालियों में इमोशन की जरूरत - शिवम नायर



कहालनयों में इमोशन की जरूरत - शिवम नायर
-अजय ब्रह्मात्‍मज
तापसी पन्‍नू अभिनीत नाम शबाना के निर्देशक शिवम नायर हैं। यह उनकी चौथी फिल्‍म है। नई पीढ़ी के कामयाब सभी उनका बहुत आदर करते हैं। संयोग ऐसा रहा कि उनकी फिल्‍में अधिक चर्चित नहां हो सकीं। नाम शबाना से परिदृश्‍य बदल सकता है। नीरज पांडेय ने बेबी की स्पिन ऑफ फिल्‍म के बारे में सोचा तो उन्‍हें शिवम नायर का ही खयाल आया।
-नाम शबाना थोड़ा अजीब सा टायटल है। कैसे यह नाम आया और क्‍या है इस फिल्‍म में?
0 बेबी में तापसी पन्‍नू का नाम शबाना था। नीरज पांडेय ने स्पिन ऑफ फिल्‍म के बारे में सोचा। भारत में यह अपने ढंग की पहली कोशिश है। ऐसी फिल्‍म में किसी एक कैरेक्‍टर की बैक स्‍टोरी पर जाते हैं। नाम शबाना टायटल नीरज ने ही सुझाया। फिल्‍म में मनोज बाजपेयी दो-तीन बार इसी रूप में नाम लेते हैं।
- नीरज पांडेय की फिल्‍म में आप कैसे आए? उन्‍होंने आप को बुलाया या आप...
0 नीरज के साथ मेरे पुराने संबंध हैं। ए वेडनेसडे के बाद उन्‍होंने मुझे दो बार बुलाया,लेकिन स्क्रिप्‍ट समझ में नहीं आने से मैंने मना कर दिया। यह विचार था कि कभी साथ काम करेंगे। मैं उनके पास झांसी वाली वेडिंग लेकर गया। उस पर बात नहीं बनी। तभी उन्‍होंने नाम शबाना का ऑफर दिया। मुझे स्क्रिप्‍ट पसंद आई। यह एक लड़की की कहानी है।
- क्‍या है नाम शबाना की कहानी?
0 शबाना मुंई के मुस्लिम इलाके में रहने वाली एक लड़की है। वह एकीडो की नेशनल चैंपियन बनना चाहती है। वह सोच में स्‍पष्‍ट लड़ी है। फालतू बातों में उसका मन नहीं लगता। वह तुरंत रिएक्‍ट करती है। स्‍ट्रांग कैरेक्‍टर है। उसकी जिंदगी में कुछ ऐसा होता है कि वह हिल जाती है। सिस्‍टम उसक सपोर्ट नहीं करता। ऐसे नाजुक मोड़ पर उस पर मनोज बाजपेयी की नजर पड़ती है। वह उसे अपने साथ ले लेता है। वह एक वड़े मिशन पर मलेशिया भेजी जाती है। मैं पहली बार स्‍पाई थ्रिलर कर रहा हूं।
- आप की पिछली फिल्‍में नहीं चलीं। क्‍या वजहें रहीं ?
0 मैं अपनी कहानी ढंग से नहीं कह सका। मैं तो आज भी कहता हूं कि अगर इम्तियाज अली ने आहिस्‍ता आहिस्‍ता निर्देशित की होती तो उसे दर्शक पसंद करते। मैं उस कहानी के साथ न्‍याय नहीं कर सका। उसके बाद की दोनों फिल्‍में कमजोर रहीं। नाम शबाना की स्क्रिप्‍ट परिष्‍कृत है। मेरी समझ में आई है। शबाना की जर्नी जाहिर है। मेरी समस्‍श्‍या है कि मैं लेखक नहीं हूं। मुझे लेखक की मदद लेनी पड़ती है। मेरी पीढ़ी के सारे निर्देशक खुद लेखक हैं। वे लंबे समय तक चलेंगे।
- फिल्‍म के कलाकारों के चुनाव में आप की क्‍या भूमिका रही? ऐसा तो नहीं कि सारे फैसले नीरज पांडेय ने लिए?
0 स्पिन ऑफ होने की वजह से तापसी पन्‍नू,अक्षय कुमार,अनुपम खेर और डैनी डेंजोग्‍पा को होना ही था। मनोज बाजपेयी मेरे पुराने दोस्‍त हैं। फिर भी उनकी भूमिका में मैं पहले किसी और एक्‍टर के बारे में सोच रहा था। नीरज ने आश्‍वस्‍त किया कि मनोज ही सही रहेंगे। रीडिंग आरंभ हुआ तो मुझे पता चला कि मनोज तो कलाकार के तौर पर काफी इवॉल्‍व हो गए हैं। वे बदल गए हैं। उन्‍होंने किरदार को पकड़ लिया। उनके बॉडी लैंग्‍वेज में कड़कपन चाहिए था। मैंने मनोज को बताया भी कि मैं पहले तुम्‍हारे लिए तैयार नहीं था। दक्षिण से मैं पृथ्‍वी राज को ले आया। वीरेन्‍द्र सक्‍सेना को भी एक खास रोल में देखेंगे।
-तापसी पन्‍नू और अक्षय कुमार के बारे में क्‍या कहेंग?
0 उनका तो करिअर डिफाइनिंग रोल है। उन्‍होंने बहुत अच्‍छा परफार्म किया है। एक्‍शन और इमोश दोनों तरह के सीन में वह परफेक्‍ट हैं। अक्षय कुमार प्रोफेशनल और अनुशासित एक्‍टर हैं। वे सेट पर रहते हैं तो 100 प्रतिशत रहते हैं। उनकी तरफ से कभी कोई दिक्‍कत नहीं हुई। मैं भी पहली बार पॉपुलर स्‍टार के साथ काम कर रहा था। उनसे एक कनेक्‍ट बना। अक्षय कुमार के चलने की वजह यही है कि उन्‍होंने खुद को रीइन्‍वेंट किया है।
-इधर का सिनेमा कितना बदल गया है?
0 अभी क्राफ्ट करेक्‍ट हो गया है। हमलोग इमोशन लाने में पिछड़ रहे हैं। आप राज कपूर,बिमल राय और गुरू दत्‍त की फिल्‍मों मेकं इमोशन का लेवल देखिए और आज की फिल्‍मों पर नजर डालिए। अभी केवल राजकुमार हिरानी और इम्तियाज अली उस दिशा में थोड़ा आगे बढ़ हैं। हमार पीढ़ी कहानी और इमोशन में मार खा रही है। नए लेखक इंप्रेस करने के लिए लिख रहे हैं। उनके लेखन में गहराई नहीं आ पाती। सभी जल्‍दबाजी मैं हैं।

Sunday, March 19, 2017

शबाना नाम है जिसका- तापसी पन्‍नू



शबाना नाम है जिसका- तापसी पन्‍नू
-अजय ब्रह्मात्‍मज
तापसी पन्‍नू की नाम शबाना भारत की पहली स्पिन ऑफ फिल्‍म है। यह प्रीक्‍वल नहीं है। स्पिन ऑफ में पिछली फिल्‍म के किसी एक पात्र के बैकग्राउंड में जाना होता है।
तापसी पन्‍नू ने नीरज पांडेय निर्देशित बेबी में शबाना का किरदार निभाया था। उस किरदार को दर्शकों ने पसंद किया था। उन्‍हें लगा था कि इस किरदार के बारे में निर्देयाक को और भी बताना चाहिए था। तापसी कहती हैं, दर्शकों की इस मांग और चाहत से ही नाम शबाना का खयाल आया। नीरज पांडेय ने बेबी के कलाकारों से इसे शेयर किया तो सभी का पॉजीटिव रेस्‍पांस था। इस फिल्‍म में पुराने लीड कलाकार अब कैमियो में हैं। दो नए किरदार जोड़े गए है,जिन्‍हें मनोज बाजपेयी और पृथ्‍वी राज निभा रहे हैं। मनोज बाजपेयी ही मुझे स्‍पॉट कर के एस्‍पीनोज एजेंसी के लिए मुझे रिक्रूट करते हैं।
नाम शबाना की शबाना मुंबई के भिंडी बाजार की निम्‍नमध्‍यवर्गीय मुसलमान परिवार की लड़की है। उसके साथ अतीत में कुछ हुआ है,जिसकी वजह से वह इस कदर अग्रेसिव हो गई है। तापसी उसके स्‍वभाव के बारे में बताती हैं, वह कम बोलती है। मेरे स्‍वभाव के विपरीत है। हम दोनों के बीच एक प्रतिशत भी समानता नहीं है। इस किरदार को शारीरिक तौर पर आत्‍मसात करने से अधिक मुश्किल था उसे मानसिक स्‍तर पर समझना। वह बोलती कम है,लेकिन समझती सब कुछ है। वह किसी भी मामले में पलट कर रिएक्‍ट करती है। वह भांप लेती है कि क्‍या होने वाला है। तभी मनोज बाजपेयी उसे रिक्रूट करना चाहते हैं। वह पहनावे में पर्दादारी करती है,लेकिन बुर्का और हिजाब में नहीं रहती है। उसके बात करने के लहजे में पूरी सफाई है। मुझे लहजे का भी अभ्‍यास करना पड़ा। कहानी का भेद खुल जाने के डर से तापसी नहीं बतातीं कि उसे क्‍यों रिक्रूट किया गया और वह क्‍यों राजी हुई? वही तो स्‍टोरी है, मैं नहीं बता सकती।
तापसी पून्‍नू इस फिल्‍म की शूटिंग के दौरान रोमांचित रहीं। ज्‍यादातर शूटिंग मुंबई के रियल लोकेशन में हुई है। वह शूटिंग के अनुभव शेयर करती हैं, मैं मुंबई के नल बाजार में घूम रही थी। कई बार लोग मुझ से पूछते थे कि क्‍या हो रहा है? कौन सी फिल्‍म है? मैं कौन हूं? अच्‍छा था कि लोग मुझे पहचान नहीं रहे थे या यों कहें कि तवज्‍जो नहीं दे रहे थे। कुछ ने पहचाना कि यह साउथ की फिल्‍म कांचना 2 की हीरोइन है। मुझे कुछ नया सा नहीं लगा। दिल्‍ली के जामा मस्जिद के पीछे की बस्‍ती की फीलिंग आती है। केवल मच्‍दी की गंध से दिक्‍कत हो रही थी। रियल लोकेशन पर लोग परेशान न करें तो बहुत मजा आता है। मैं तो गली-नुक्‍क्‍ड़ के लोगों से घुलमिल गई थी। मैंने तो कुछ दृश्‍यों में बॉडीगार्ड भी हटा दिए। गली की भीड़ का हिस्‍सा बन जाना मजेदार था।
तापसी चाहती थीं कि नीरज पांडेय ही इसे डायरेक्‍ट करें। नीरज ने उन्‍हें समझाया कि मैं लिख रहा हूं और मैं ही निर्माता हूं। सेट पर भी रहूंगा। तुम तनाव मत लो। तापसी के शब्‍दों में, वे नाम शबाना के डायरेक्‍टर शिवम नायर को अपना सीनियर मानते हैं। उन्‍होंने भरोसा दिलाया। शिवम नायर भी नीरज सर की तरह कम बोलते हैं। उन्‍होंने दूसरे निर्देशकों से अलग कुछ भी बताने,समझाने या डायरेक्‍अ करने के समय पास आकर ही सब कुछ बताया। उनकी यह बात मुझे बहुत अच्‍छी लगी। वे सीधे अपनी बात कहते थे। मुझे दोनों की शैली में अधिक फर्क नहीं लगा। और चूंकि शबाना उनकी क्रिएशन है,इसलिए वे शबाना से ज्‍यादा वाकिफ थे। उसकी बारीकियां जानते थे।
तापसी मानती हैं कि कामयाबी से लोगों का परसेप्‍शन और अपना कंफीडेंस बढ़ता है। पिंक की कामयाबी और सराहना से फर्क तो आया है। वह कहती हैं,व्‍यक्तिगत स्‍तर पर कुछ दिनों तक कुछ हासिल करने का अहसास रहता है। फिर जिंदगी रुटीन में आ जाती है। इंडस्‍ट्री और दर्शकों की सोच बदल जाती है। उनसे भाव मिलने लगता है। पिंक सभी उम्र और तबके के दर्शकों ने देखा है। आम व्‍यक्तियों से सराहना मिलती है तो मैं एंज्‍वॉय करती हूं।
तापसी डेविड धवन की फिल्‍म जुड़वां के लिए उत्‍साहित हैं। वे कहती हैं, मेंरे लिए गर्व की बात है कि उन्‍होंने मुझे चुना। मैंने उनसे पूछा कि मुझे क्‍या तैयारी करनी है? उन्‍होंने इतना ही कहा तूझे अच्‍छा लगना है। हर अभिनेत्री चाहती है कि उसे ऐसी फिल्‍ मिले।