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Thursday, April 13, 2017

रोज़ाना : धरम जी समझ सकते हैं...



रोज़ाना
धरम जी समझ सकते हैं...
-अजय ब्रह्मात्‍मज
कल सभी अखबारों में खबर थी कि सलमान खान अपनी आत्‍मकथा नहीं लिखेंगे या यों कहें कि नहीं लिख सकते। आशा पारेख की खालिद मोहम्‍मद लिखित आत्‍मकथा द हिट गर्ल के विमोचन के अवसर पर सलमान खान ने यह बयान दिया। उन्‍होंने आशा पारेख जैसी सेलिब्रिटी की तारीफ की। उन्‍होंने कहा कि आत्‍मकथा लिखना बहादुरी का काम है। मुझ से तो लाइफ में ना हो। धरम जी समझ सकते हैं.... इसके बाद हॉल में तालियां बजीं। लोग हंसे और खिलखिलाए। सलमान खान शरमाए। होंठ पोंछे और शरारती निगाहों से हॉल में मौजूद लोगों को देखा। फिर से तालियां बजीं। लगभग 20 सेकेंड के इस अंतराल में सलमान खान ने कुछ नहीं कहा,लेकिन लोगों ने सब कुछ समझ लिया। दरअसल,सलमान खान जैसी सेलिब्रिटी जब वाक्‍य अधूरा छोड़ते हैं तो आगे के शब्‍द और उनका आशय भी लोग समझ लेते हैं।
आत्‍मकथा किसी भी व्‍यक्ति का वस्‍तुनिष्‍ट और निष्‍पक्ष जीवन इतिहास है,जिसे वह खुद लिखता या लिखवाता है। पहले के कवि और शायर अपनी रचनाओं में खुद के बारे में लिख देते थे। हिंदी में आत्‍मकथा की शुरूआत साहित्‍य की अन्‍य विधाओं की तरह भारतेन्‍दु हरिश्‍चंद्र से हुई। उन्‍होंने एक कहानी : कुछ आपबीती कुछ जगबीती नाम से आत्‍मकथा लिखी थीं। राहुल सांकृत्‍यायन और हरिवंश राय बच्‍चन की आत्‍मकथाएं मशहूर हैं। गांधी,नेहरू,राजेन्‍द्र प्रसाद की आत्‍मकथाओं से भी हम परिचित हैं। फिल्‍मी हस्तियों में आत्‍मकथा लिखने का चलन इधर बढ़ा है। ज्‍यादार फिल्‍मी हस्तियों ने दूसरे लेखकों से अपनी आत्‍कथाएं कलमबद्ध की हैं। देव आनंद ने रोमांसिंग विद लाइफ खुद लिखी थी। लिखें तो हिंदी-अंग्रेजी में दक्ष अमिताभ बच्‍चन की आत्‍मकथा रोचक होगी। खानत्रयी में अभी तक शाह रूख खान की जीवनियां आई हैं,जिनमें अनुपमा चोपड़ा की किंग ऑफ बॉलीवुड श्रेष्‍ठ है। तीनों खानों के लबे करिअर और जीवन को समेटती किताबे आनी चाहिए।
सलमान खान धरम जी के बहाने जो सकेत दे रहे थे...वास्‍तव में वह उनकी जिंदगी के रोमांस और उथल-पुथल पूर्ण जिंदगी की तरफ इशारा करता है। एक बार एक पत्रकार ने सलमान खान से उनकी हीरोइनों के बारे में एक फीचर के लिए बातचीत करने की कोशिश की तो तो मुंहफट सलमान खान का सवाल था,क्‍या बताऊं? किस के साथ कब....
फिर भी सलमान खन समेत सभी फिल्‍मी हस्तियों को अपनी आत्‍मकथा या जीवनी लिखनी-लिखवानी चाहिए। अगर वे स्‍वयं न कर पाएं तो फिल्‍म शोधार्थियों को इस दिशा में प्रयास करना चाहिए।
@brahmatmajay