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Thursday, May 23, 2013

कान फिल्म फेस्टिवल में गूंजी हिंदी



-अजय ब्रह्मात्मज
    देवियों और सज्जनों, नमस्कार। भारतीय सिनेमा 100 वर्ष पूरे कर चुका है और इस अवसर पर में कान फिल्म फेस्टिवल में अपना आभार प्रकट करता हूं और धन्यवाद देता हूं कि मुझे आज यहां आमंत्रित किया और इतने भव्य समारोह में हमें सम्मानित किया।
    मुख्य रूप से चार मनोभावों को और  ़ ़ ़ और से जोड़ता हिंदी में बोला गया यह लंबा वाक्य अमिताभ बच्चन के आत्मविश्वास को जाहिर करता है। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में फिलहाल अमिताभ बच्चन अकेले ऐसे शख्स हैं, जो निस्संकोच और धाराप्रवाह हिंदी बोलते हैं। आप उनसे हिंदी में सवाल पूछें तो उसका जवाब हिंदी में मिलेगा। आप के सवाल में भले ही आदतन अंग्रेजी के शब्द आ गए हों, लेकिन वे जवाब देते समय अंग्रजी के एक भी शब्द का प्रयोग नहीं करते। उनकी भाषा सातवें-आठवें दशकों के मुहावरे और शब्दों से सनी होती है। हम जिन शब्दों का प्रयोग भूल गए हैं या जिनका अनुचित उपयोग करते हैं। अमिताभ बच्चन उन शब्दों को आज भी पुराने संदर्भ और अर्थ में इस्तेमाल करते हैं।
    अमिताभ बच्चन ने पहली बार हालीवुड की एक फिल्म में काम किया है। ‘द ग्रेट गैट्सबाय’ नामक उनकी फिल्म कुछ ही दिनों पहले अमेरिका में रिलीज हुई थी। कान फिल्म फेस्टिवल की ओपनिंग फिल्म के रूप में चुनी गई इस फिल्म के निर्देशक और सह कलाकारों के साथ अमिताभ बच्चन मंच पर मौजूद रहे। कान फिल्म समारोह के आधिकारिक उद्घाटन के लिए उन्हें लियोनाडो डिकैप्रियो के साथ आमंत्रित किया गया। अमिताभ बच्चन ने पहले अपनी बात अंग्रेजी में रखी और फिर हिंदी में अपने मनोभाव दोहराना नहीं भूले। हिंदी बोलते समय उनकी आंखें चमक रही थीं। किसी भी भाषा के सम्मान के ये क्षण महत्वपूर्ण होते हैं। खास कर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के लिए यह और भी उल्लेखनीय है, क्योंकि यहां हिंदी का चलन दिनोंदिन कम होता जा रहा है। सिर्फ फिल्में हिंदी में बनती हैं। उनके सवांद हिंदी में रहते हैं। बाकी कारोबार और व्यवहार की भाषा अंग्रेजी हो चुकी है।
    हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का यह विचित्र व्यवहार दुनिया में अनोखा है। मुझे नहीं मालूम कि चीनी, कोरियाई, जर्मन, तमिल, तेलुगू और बंगाली फिल्में अपनी भाषाओं में लिखी जाती हैं कि अगे्रजी में ़ ़ ़ या फिर रोमन हिंदी की तरह रोमन चीनी, रोमन कोरियाई, रोमन जर्मन, रोमन तमिल, रोमन तेलुगू और रोमन बंगाली में ़ ़ ़ कितनी शर्म की बात है कि हिंदी फिल्मों का पहला पोस्टर रोमन हिंदी में आता है। हर इवेंट, प्रेस कांफ्रेंस और इंटरव्यू में फिल्म बिरादरी की प्राथमिकता अंग्रेजी रहती है। अगर आप हिंदी पत्र-पत्रिका से जुड़े पत्रकार हैं या हिंदी में सवाल करते हैं तो आप को हेय एवं तुच्छ नजरों से देखा जाता है। चंद हिंदी फिल्म पत्रकारों से मुंबई के कलाकार मुखामुखम बातें करते हैं। ज्यादातर मामलों में सामूहिक साक्षात्कार का सिलसिला चल पड़ा है। अफसोस की बात है कि असुरक्षा भाव की वजह से अखबार और पत्रकार इस सिलसिले का विरोध नहीं करते।
    हम कान फिल्म फेस्टिवल में अमिताभ बच्चन के हिंदी संभाषण की बात कर रहे थे। कान फिल्म फेस्टिवल में इस बार भारतीय सिनेमा 100 साल को रेखांकित किया जा रहा है। कुछ पाठकों को याद होगा कि पहले ही साल कान फिल्म फेस्टिवल में चेतन आनंद की फिल्म ‘नीचा नगर’ को श्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला था। इस साल एक अंतराल के बाद भारत की चार फिल्में वहां विभिन्न खंडों में प्रदर्शित की जा रही है। यह भी सुयोग है कि चारों फिल्मों के साथ किसी न किसी रूप में अनुराग कश्यप जुड़े हुए हैं। यहां सचमुच एक उपलब्धि है। हालांकि पहले भी भारत की ऐसी मौजूदगी रही है। फर्क इतना आया है कि अब फेस्टिवल में प्रदर्शित फिल्में आगे-पीछे थिएटर भी पहुंच रही है। आम दर्शक उन्हें देख पा रहे हैं।
    इस साल यह भी उल्लेखनीय है कि विद्या बालन कान फिल्म फिल्म फेस्टिवल के निर्णायक मंडल की सदस्य हैं। एक अलग निर्णायक मंडल में नंदिता दास भी हैं। भारत से अनेक कलाकार, फिल्मकार और तकनीशियन कान फिल्म फेस्टिवल में गए हैं। नया जोश दिख रहा है। कान फिल्म फेस्टिवल में भारत की मौजूदगी और हिंदी की गूंज सालों यार रहेगी। धन्यवाद कान फिल्म फेस्टिवल, प्रणाम अमिताभ बच्चन।



1 comment:

प्रवीण कुमार said...

सूचना प्रसारण मंत्रालय में निम्न आरटीआई लगा रहा हूँ आपके सुझाव की प्रतीक्षा है cs.praveenjain@gmail.com
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भारत में प्रदर्शित होने वाली फिल्मों एवं उनके प्रोमोज़ के नाम/शीर्षक एवं फिल्म/प्रोमोज़ के आरम्भ और अंत में (कलाकारों/गायकों के नाम/फिल्म निर्माण टीम आदि के नाम) जो कुछ भी स्क्रीन पर लिखा हुआ दिखाई देता है, उस सम्बन्ध में क्या नियम है? जैसे ऐसे शीर्षक/नाम एवं अन्य विवरण किस भाषा और लिपि में प्रदर्शित किए जाने चाहिए?

[सूप्रम अविलम्ब ऐसा नियम बनाए कि भारत में प्रदर्शित/उद्घाटित/रिलीज़ होने वाली फ़िल्में जिस भाषा की होंगी उसके नाम /शीर्षक और फिल्म के आरम्भ, अंत और फिल्म के दौरान एवं /उनके प्रोमोज़ में जो कुछ भी स्क्रीन पर लिखा हुआ दिखाई देता है, वह उसी भाषा में लिखा/टाइप किया होना अनिवार्य होगा जिस भाषा की वह फिल्म है. जैसे गुजराती अथवा तमिल भाषा की फिल्म में स्क्रीन पर लिखा हुआ सबकुछ गुजराती और तमिल में हो. यदि तमिल फिल्म का नाम अंग्रेजी में है तो भी उसे तमिल की लिपि में प्रदर्शित किया जाना अनिवार्य किया जाना चाहिए. फिल्म निर्माता फिल्म की मूल भाषा से इतर अन्य किसी भी वैकल्पिक भाषा (अंग्रेजी सहित) प्रयोग करना चाहे तो उसे इसकी छूट दी जाए परन्तु जिस भाषा की फिल्म है उसके सभी विवरण (टाइटल्स) उसी भाषा में लिखना अनिवार्य किया जाए]

भारत में प्रदर्शित होने वाली फिल्मों/वृत्तचित्र/धारावाहिक/टीवी शो/ कार्यक्रमों के पोस्टर/सीडी एवं कैसेट के आवरण/वेबसाइट आदि किस भाषा में बनाये जाने चाहिए, उस सम्बन्ध में क्या नियम हैं?

[जैसे गुजराती अथवा तमिल भाषा की फिल्म के पोस्टर/सीडी एवं कैसेट के आवरण/वेबसाइट आदि में गुजराती और तमिल प्रयोग करना अनिवार्य किया जाए. फिल्म निर्माता फिल्म की मूल भाषा से इतर अन्य कोई वैकल्पिक भाषा (अंग्रेजी अथवा हिन्दी) का प्रयोग करना चाहे तो उसे इसकी छूट दी जाए परन्तु जिस भाषा की फिल्म है उसका प्रयोग और उसको प्राथमिकता देना अनिवार्य किया जाए]

भारत सरकार द्वारा मान्य/पंजीकृत सभी टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाले सभी वृत्तचित्र/धारावाहिक/टीवी शो/ कार्यक्रमों/ समाचार अंकों (बुलेटिनों) के नाम/शीर्षक एवं कार्यक्रम आदि के आरम्भ और अंत में (कलाकारों/गायकों के नाम/फिल्म निर्माण टीम आदि के नाम) जो कुछ भी स्क्रीन पर लिखा हुआ दिखाई देता है, उस सम्बन्ध में क्या नियम है? जैसे ऐसे शीर्षक/नाम एवं अन्य विवरण किस भाषा और लिपि में प्रदर्शित किए जाने चाहिए?

भारत सरकार द्वारा मान्य/पंजीकृत सभी टीवी चैनलों द्वारा अपनी आधिकारिक वेबसाइट बनाये जाने के सम्बन्ध में क्या नियम हैं और ऐसी वेबसाइट किस भाषा में बनाई जानी चाहिए?

हर वर्ष भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया) के आयोजन में हर स्तर पर भारत की राजभाषा की घोर उपेक्षा की जाती है और राजभाषा सम्बन्धी प्रावधानों का खुला उल्लंघन होता है. उल्लंघन की बानगी कुछ इस प्रकार है : (क) समारोह के बैनर, पोस्टर, हस्त-पुस्तिकाएँ, सूची-पत्र (कैटलाग) केवल अंग्रेजी में छापे जाते हैं जबकि इन्हें अनिवार्य रूप से हिन्दी-अंग्रेजी दोनों में होना चाहिए. (ख). समारोह का प्रतीकचिह्न भी केवल अंग्रेजी में जारी किया जाता गया है और वर्षों से ऐसा हो रहा है. (ग) समारोह की वेबसाइट की वेबसाइट भी केवल अंग्रेजी में बनायी है. भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के आयोजन में राजभाषा के अनुपालन की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है उसका नाम, पदनाम, पता, फैक्स नम्बर एवं ईमेल आईडी क्या है? भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव एवं इसी तरह के भारत में आयोज्य अन्य अन्तराष्ट्रीय कार्यक्रमों के आयोजन में राजभाषा के अनुपालन के लिए मंत्रालय ने पिछले ३ वर्षों में क्या कदम उठाए हैं?

४४वां भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव इस वर्ष २० से ३० नवंबर २०१३ के बीच आयोजित होगा उसमें राजभाषा के अनुपालन और हिन्दी के प्रयोग को सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय क्या कदम उठा रहा है? उसकी क्या योजना है?