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Friday, July 20, 2012

हौले-हौले आ गया हॉलीवुड

हौले-हौले आ गया हॉलीवुड-अजय ब्रह्मात्‍मज 
बीस जुलाई को बैटमैन की अगली कड़ी भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज होगी। अंग्रेजी के साथ हिंदी, तमिल, तेलुगु में रिलीज हो रही इस फिल्म को भी वफादार दर्शकों के साथ कुछ और दर्शक भी मिलेंगे। हॉलीवुड की फिल्में भारतीय फिल्म बाजार में हौले-हौले अपनी जगह बना रही हैं। साधारण से साधारण हॉलीवुड फिल्में भी उल्लेखनीय कलेक्शन कर रही हैं। अगर चर्चित और प्रतीक्षित फिल्म हो तो उसका कलेक्शन हिंदी फिल्मों के समकक्ष या उससे ज्यादा भी होता है। हॉलीवुड की द अमेजिंग स्पाइडरमैन का कलेक्शन पहले ही हफ्ते में 41 करोड़ का आंकड़ा पार कर गया था।
हिंदी के साथ अन्य भारतीय भाषाओं में डब करने का चलन बढ़ने से हॉलीवुड का बाजार बढ़ा है। भारतीय दर्शकों को अपनी भाषा में वहां की फिल्में देखने को मिल रही हैं। हॉलीवुड के निर्माता मामूली खर्च कर हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में डबिंग कर लेते हैं। इन फिल्मों का जमकर प्रचार किया जाता है। टीवी प्रोमो से लेकर प्रिंट माध्यम में फिल्म के विज्ञापन चलते-छपते हैं। मिशन इंपॉसिबल-4 के लिए तो खुद टॉम क्रूज भारत आए। यहां अनिल कपूर ने उनकी अगवानी की और पूरी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री ने उनसे मिलने का उत्साह दिखाया। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के स्टार और निर्माता हॉलीवुड जैसी लोकप्रियता और कमाई की आस में नकल करने से भी नहीं हिचकते।
हॉलीवुड के निर्माता औपनिवेशिक मानसिकता से भले ही निकल गए हों, लेकिन भारतीय मानसिकता में हीन ग्रंथि अभी तक बनी हुई है। तभी तो हॉलीवुड की घटिया और साधारण फिल्में भी हमें श्रेष्ठ लगती हैं। अंग्रेजीदां समीक्षक इस हीन ग्रंथि को बढ़ाने का काम करते हैं। वे हिंदी फिल्मों की समीक्षा करते समय भी अंग्रेजी फिल्मों के साक्ष्य और उदाहरण देने से नहीं हिचकते।
दरअसल, पूरी दुनिया में अकेली भारतीय फिल्म इंडस्ट्री ने ही हॉलीवुड के आगे घुटने नहीं टेके। हम तकनीक और प्रस्तुति में भले ही उनसे पीछे हों, लेकिन अपने दर्शकों का मनोरंजन करने में उनसे बहुत आगे हैं। दर्शकों को भारतीय रुचि का मनोरंजन देने में भारतीय फिल्म इंडस्ट्री का जवाब नहीं। ग्लोबल हो रही दुनिया के इस दौर में स्वाद और मनोरंजन गड्ड-मड्ड हो रहे हैं। फिर भी बचपन से जीभ पर चढ़ा स्वाद और मन पर चढ़ा मनोरंजन जोर मारता है। चंद प्रयोगों के बाद हमें फिर से अपने भोजन और सिनेमा की याद आती है।
स्टीवन स्पिलबर्ग की द जुरासिक पार्क की लोकप्रियता के बाद से हॉलीवुड ने रणनीति के साथ भारतीय बाजार में प्रवेश करना आरंभ किया। देश के दर्शकों का एक हिस्सा हमेशा से हॉलीवुड की फिल्मों का दीवाना रहा। निज भाषा में आने पर यह दीवानगी हिंदी भाषी दर्शकों पर भी असर करती दिखाई पड़ी। अभी तो आलम यह है कि हॉलीवुड की फिल्में औसत कलेक्शन कर ही लेती हैं। हालांकि अभी तक हॉलीवुड की किसी फिल्म ने 100 करोड़ का आंकड़ा पार नहीं किया है, लेकिन ज्यादा देर नहीं लगेगी। अवतार ने 90 करोड़ का कलेक्शन कर इसका संकेत दे दिया है। 2012 ने 65 करोड़ और द एवेंजर ने 47 करोड़ का कलेक्शन किया था। भारतीय दर्शकों की ऑल टाइम फेवरिट टाइटेनिक भी हॉलीवुड की टॉप-5 फिल्मों में शामिल है।
हॉलीवुड की फिल्मों से लड़ने और बचाने का कोई तरीका नहीं है। आने वाले समय में हॉलीवुड फिल्मों की भारतीय बाजार में मौजूदगी बढ़ेगी। अभी दो-चार फिल्में अमेरिका और दूसरे देशों से पहले भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज हुई हैं। वह दिन दूर नहीं, जब दशहरा, दीवाली और ईद की छु˜ियां देखकर हॉलीवुड की फिल्में भारत में पहले रिलीज हो जाएं। भारतीय बाजार में हॉलीवुड का कारोबार दोगुना हो गया है। पहले वहां की फिल्मों के कुल कलेक्शन का 3.4 प्रतिशत व्यापार भारत में होता था। अभी यह आंकड़ा 6.8 प्रतिशत हो चुका है। पहले साल मैं 5-6 फिल्में ही डब होकर भारत में रिलीज होती थीं। अगर यह संख्या बढ़कर 50 पार कर चुकी है।

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