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Sunday, October 10, 2010

अमिताभ बच्‍चन : हो जाए डबल आपकी खुशी -सौम्‍या अपराजिता /अजय ब्रह्मात्‍मज

कल 11 अक्टूबर को अमिताभ बच्चन का 68वां जन्मदिन है और कल ही शुरू हो रहा है 'कौन बनेगा करोड़पति' का चौथा संस्करण। इस अवसर पर उनसे एक विशेष साक्षात्कार के अंश..

[कल आपका जन्मदिन है। प्रशंसकों को क्या रिटर्न गिफ्ट दे रहे हैं?]

उम्मीद करता हूं कि मेरा जन्मदिन मेरे चाहने वालों के लिए खुशियों की डबल डुबकी हो। जन्मदिन तो आते रहते हैं, पर इस बार कौन बनेगा करोड़पति मेरे जन्मदिन पर शुरू हो रहा है, यह मेरे लिए बड़े सौभाग्य की बात है। अभी तक मैंने जितने भी एपिसोड की शूटिंग की है, उसमें ज्यादातर प्रतियोगी छोटे शहरों और गांवों के लोग हैं। इंटरनेट और कंप्यूटराइजेशन की वजह से उनके पास भी बहुत सारा ज्ञान है। वे सब जानते हैं, पर धनराशि के अभाव में वे प्राइमरी एजुकेशन के बाद ज्यादा नहीं पढ़ पाते हैं। कई ऐसे प्रतियोगी केबीसी में आए हैं, जिन्होंने मुझे बताया कि मेरे पास पचास हजार रुपए नहीं थे, इसलिए मैं एमबीए नहीं कर पाया। सिविल सर्विसेज की तैयारी करनी थी, पर पैसे नहीं थे, तो आम लोगों के लिए यह एक अच्छा अवसर है। अभी कौन बनेगा करोड़पति शुरू होगा उसके बाद फिल्में होगी, जो अगले साल प्रदर्शित होंगी। राज कुमार संतोषी की पावर होगी। तेलुगू के पुरी जगन्नाथ की बुड्ढा, प्रकाश झा की आरक्षण, राकेश मेहरा के एक सहायक की फिल्म भी है।

[1990 में आई 'अग्निपथ' के लिए 48 की उम्र में आपको दूसरा राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। 'सात हिंदुस्तानी' के लिए मिले पहले पुरस्कार को छोड़ रहा हूं। इस बीच आप 'एंग्री यंग मैन' की इमेज के साथ उभरे, लेकिन आपकी इस लोकप्रिय छवि को कभी कोई पुरस्कार नहीं मिला। 'अग्निपथ' ,फिर 'ब्लैक' और अब 'पा', आखिर क्यों आप हमेशा छवि से भिन्न भूमिकाओं के लिए पुरस्कृत हुए?]

यह तो पुरस्कार देने वाली संस्थाओं का दृष्टिकोण है। वे किस वजह से और क्यों पुरस्कार देती हैं? इसकी मुझे जानकारी नहीं है। सही मायने में आपके सवाल में सच्चाई है। जिन फिल्मों को आइडेंटिफाई किया गया था मेरी छवि से उनको पुरस्कार नहीं मिला। जिस एंग्री यंग मैन को जंजीर में रूप दिया गया, उसे पुरस्कार नहीं मिला। न ही दीवार में मिला, न त्रिशूल में मिला ़ ़ ़ काला पत्थर, शोले, मुकद्दर का सिकंदर में भी नहीं मिला ़ ़ ़ मिला अमर अकबर एंथनी के लिए फिल्मफेअर का पुरस्कार।

इस पुरस्कार के अगले दिन या दो दिनों के बाद मैं वर्ली में शूटिंग कर रहा था। उस जमाने में ट्रेलर और वैनिटी वैन नहीं होती थी। किसी के घर में एक कमरा ले लिया जाता था आग्रह कर ़ ़ ़ उन्होंने जिस मकान में कमरा रखा था कपड़ा-वपड़ा बदली करने के लिए ़ ़ ़ उसकी मालकिन ज्यूरी में थीं। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं ज्यूरी में थी। मैंने पूछा भी कि अमर अकबर एंथनी में ऐसा क्या दिखा कि आप ने उसके लिए पुरस्कार दिया? उन्होंने कहा कि आप एंग्री यंग मैन तो हैं, लेकिन पहली बार कामेडी किया तो हमने दिया। मैंने पूछा भी कि लेकिन 'एंग्री यंग मैन' के लिए क्यों नहीं दिया?

यह प्रश्न हमारे सामने हमेशा रहा है। मैं यह समझता हूं कि ज्यूरी का अपना दृष्टिकोण होता है। अब दे दिया गया है तो उसे स्वीकार कर लेना चाहिए। मेरे हिसाब से सबसे बड़ा पुरस्कार जनता का प्यार है। वे जब हमारी फिल्म देखने जाते हैं और भारी तादाद में देखने जाते हैं, तब हमें जो पुरस्कार मिलता है उसके मुकाबले कोई पुरस्कार नहीं होता। आज जंजीर, दीवार, त्रिशूल और मुकद्दर का सिकंदर का जिक्र आप पुरस्कार नहीं मिलने पर भी करते हैं तो यही हमारे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।

[आप अपनी उपलब्धियों को ज्यादा महत्व नहीं देते,जबकि दूसरों के लिए वे ईष्र्या का विषय हैं। आप इन उपलब्धियों का श्रेय अनुभव, अभ्यास और अभिनय में किसे देंगे?]

अंदर से बात आनी चाहिए और थोड़ा-बहुत अभ्यास करना होता है। क्रिएटिव फील्ड में लगातार अभ्यास होना चाहिए। न केवल अभ्यास, बल्कि अन्य लोगों का काम देखना ़ ़ ़ सभी पर विस्तार से नजर रखना कि क्या चल रहा है, क्या हो रहा है ़ ़ ़ उससे अवगत रहना। कलाकार के लिए यह जरूरी है। आप लेखक हैं तो दूसरों की किताबें पढ़ते हैं ़ ़ ़ पेंटर हैं तो विख्यात चित्रकारों की पेंटिंग्स देखते हैं कि कैसे रंग इस्तेमाल हुए हैं? कलाकार की जिंदगी में यह जरूरी है कि साथ के कलाकारों का काम देखे ताकि उनसे सीख सके। बदलती पीढ़ी के साथ काम मिलता रहे तो हमें भी एक अवसर मिलता है कि उनकी सोच से हमारी सोच मिले। जब मैं सेट पर जाता हूं तो मेरी उम्र नई पीढ़ी के कलाकारों की औैसत उम्र से 30-40 साल ज्यादा होती है। अच्छा लगता है कि मैं भी नौजवान पीढ़ी के साथ शामिल हूं। उनकी बातें सुनता हूं। उनका नजरिया सुनता हूं। मैंने कभी यह प्रयत्न नहीं किया कि अपना नजरिया उनके ऊपर थोपूं। मैं ऐसा मानता हूं कि नई पीढ़ी पिछली पीढ़ी को पीछे छोड़ देगी। यह तो जीवन है ़ ़ ़ इसमें क्या बुराई है। मान लेना चाहिए कि अब आप उस जगह नहीं हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि उस जगह नहीं हैं तो घर पर बैठें। आप काम करना चाहते हैं तो इस मंशा से काम करें कि आप को पुरानी चीज नहीं मिलने वाली है। इसे स्वीकार कर लें।

[क्या अभी भी पुरस्कार मिलने पर ऐसा लगता है कि आपने कोई परीक्षा उत्ताीर्ण की हो?]

पुरस्कारों का मैं कभी निरादर नहीं करता। उतनी ही उत्सुकता से स्वीकार करता हूं जैसे कि स्कूल की परीक्षा में पास या फेल हो गए। ऐसा सोचना मैंने बंद कर दिया है कि बहुत पुरस्कार मिल चुके हैं, अब लेकर क्या करेंगे? ऐसा सोचना पुरस्कार देने वालों का निरादर करना है।

[आप की सक्रिय महत्वाकांक्षा के प्रेरक कौन हैं, दर्शक, आलोचक या आप स्वयं?]

तीनों चीजें हैं। हमारे अंदर काम करने की इच्छा होनी चाहिए। हम ऐसा काम कर रहे हैं, जिसमें प्राथमिकता दर्शक को मिलती है। दर्शक तय करते हैं कि आपका काम उन्हें अच्छा लग रहा है कि बुरा लग रहा है। अगर आप इसे स्वीकार नहीं करना चाहते हैं तो इस लाइन से हट जाइए। जाहिर है कि हर काम अच्छा नहीं होगा। कुछ में त्रुटियां और कमियां होंगी। ये त्रुटियां और कमियां आपको स्वयं न दिखें, लेकिन जो देख रहे हैं, पैसे खर्च कर रहे हैं, आप के लिए अपना समय दे रहे हैं, उन्हें तो दिख रही हैं। उनके निर्णय से हमें सीखना होगा। इस व्यवसाय में दर्शक बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। उनकी प्रतिक्रिया और आलोचना महत्वपूर्ण है। उनसे हम सीखते हैं। यह नहीं मान लेना चाहिए कि हम ने तो ऐसा किया, ये ऐसा क्यों बोल रहे हैं ़ ़ ़ ये गलत बोल रहे हैं। यह गलत हो जाएगा। यह भी हो सकता है कि एक समय वे आप से कहें कि अब आप काम मत कीजिए, क्योंकि अब जो कुछ भी आप कह रहे हैं, उसमें हमारी रुचि नहीं है तो उसे भी सुनना चाहिए। अब या तो चुनौती समझ कर हम कुछ अलग काम करें या उसे मान लें, यह व्यक्तिगत निर्णय होगा। अभी मैं ट्विटर और ब्लॉग पर हूं, वहां लोग अपने विचार डालते हैं। अब यह जरूरी थोड़े ही है कि सभी लोग अच्छी बातें करें। गालियां भी पड़ती हैं, विरोध भी होता है। कई लोग ऐसे भी कहते हैं कि बुढ़ाए गए हो यार, अब छोड़ो। हम भी पढ़ते हैं ़ ़ ़ हमें ज्ञात होता है कि हर व्यक्ति हम से प्रसन्न नहीं हैं। कहीं न कहीं यह बात दिमाग में रहती है। नया काम हाथ में लेते समय यह ध्यान में रहता है कि उस आदमी ने ऐसा कहा था, उसे ध्यान में रखना चाहिए।

[विज्ञापन, टीवी शो या फिल्म ़ ़ आप जो भी करें, उसकी गरिमा बढ़ जाती है। मार्केट बढ़ जाता है। ट्विटर या ब्लॉग, सभी जगह आप पॉपुलर हैं। दर्शकों की मनोभावना को समझना एक चुनौती है। कई कलाकार इसमें चूक जाते हैं। आप कैसे इसे सिद्ध करते हैं?]

यह मेरा अपना दृष्टिकोण है। मैं ऐसा मानता हूं कि आपको जनता ने बनाया और संवारा है। उनकी वजह से आप पनपे हैं ़ ़ ़आपको आदर-सम्मान मिलता है, लेकिन इसके साथ कहीं न कहीं आपका भी श्रेय है कि आप उनको क्या दे रहे हैं? यह मुझे निर्णय लेना होगा कि मैं कैसे अपने आपको जनता के सामने पेश करूं। मैंने हमेशा यह माना है कि मुझे कोई ऐसा काम नहीं करना है, जिसके लिए बाबूजी उठ कर सामने खड़े हों और कहें कि बेटा तुम ने यह गलत काम किया। उनके साक्ष्य से यह मेरा कर्तव्य बनता है कि मैं जीवन में जो कुछ भी करूं या मेरे परिवार के सदस्य जो कुछ भी जीवन में करें ़ ़ ़ हर जगह मां-बाबूजी सामने रहें। उन्होंने जैसे पाला-पोसा, उसमें किसी प्रकार का क्लेश न हो।

हम भाग्यशाली हैं कि जनता ने हमें स्वीकार कर लिया है। कभी कुछ विपरीत किया हो तो जनता हमें बोल देती है कि आपने सही नहीं किया है। हम उसे ठीक करने या उन्हें समझाने की कोशिश करते हैं कि हमने यह किस वजह से किया और आप को क्यों स्वीकार करना चाहिए। अगर वे फिर भी नहीं स्वीकार करते तो हाथ जोड़ कर क्षमा मांग लेते हैं!


4 comments:

manish joshi said...

बहुत अच्‍छा इंटरव्‍यू है। सधे हुए सवाल सधे हुए जवाब। सवाल और जवाब दोनो में अनुभव झलकता है।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

महानायक को उनके जन्मदिन की बधाई हम भी आपके माध्यम से दे देते हैं!
--
कल उन तक अवश्य पहुँचा दीजिएगा!

sahyatri said...

achcha laga.mahanayak ko janam din ki badhai.

saathi4ever said...

Sarvpratham to mai mahanaayak AMIT ji ko janm din ki hridey se koti koti VADHAAYEE dena chahunga,aur unki lambi aayu ki dua bhi.

Tatpashchaat mai dil se sarahna chaahunga Saumyaji aur ajayji ke iss lekh ke bahukondeeye aayamon ko choone ke liye.
EK NIVEDAN :-
Aap sabhi paathkon,Saumyaji
aur Ajayji se ki
AMITAABH BACHCHAN ji se Internet ka Sampark link yadi aap kisi ko gyaat ho to mujhe kripya meri Mail ID saathi4ever2@breakthru.com
par bhejne ka kasht zarurkaren .
iss ke liye mai aap sabhi ka sadaiv AABHAREE rahunga dhanyawaad.
Yuvi