-अजय ब्रह्मात्मज
पहले अमिताभ बच्चन, फिर आमिर खान और बाद में मधुर भंडारकर ने आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर हो रहे नस्लवादी हमलों की निंदा की है। सभी ने अपने ब्लॉग और स्तंभ में कड़े शब्दों में विरोध दर्ज किया और अपनी भावनाएं व्यक्त करने में कोताही नहीं बरती। इसका असर हुआ। एक तो इन हस्तियों के उल्लेख के जरिए देश के नागरिक इसके प्रति जागरूक हुए। उन्होंने इस तरफ ध्यान दिया। इसके अलावा आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि नस्लवादी आक्रमणकारियों से निबटने के साथ भारतीय छात्रों की सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया जाएगा। आस्ट्रेलिया के क्रिकेटर ब्रेट ली ने अपने देशवासियों से अपील की है कि वे ऐसे नस्लवादी व्यवहार से बचें।
मीडिया में कुछ लोगों ने बिग-बी और आमिर की बातों का मखौल उड़ाते हुए लिखा है कि इन स्टारों ने चर्चा में बने रहने के लिए इस मुद्दे पर स्टैंड लिया। आमतौर पर सेलिब्रिटी की कोशिश, मंतव्य और इरादों के पीछे सबसे पहले हम उनके निहित स्वार्थ ही खोजते हैं। समाज में ऐसी धारणा बन गई है कि बगैर निजी स्वार्थ के फिल्मों से जुड़े लोग न मुंह खोलते हैं, न कदम बढ़ाते और न सक्रिय होते हैं। इस धारणा के पीछे उनका पिछला व्यवहार होता है। खासकर हमारे हिंदी फिल्मों के स्टार सामाजिक मुद्दों पर अपनी खामोशी को राजनीतिक दृष्टि से उपयुक्त मानते हैं। हां, कोई हादसा हो जाए, तो वे मुखर होते हैं, क्योंकि वहां व्यक्तिगत राजनीतिक सोच से अधिक व्यापक चिंताएं काम कर रही होती हैं और उन पर विवाद की संभावनाएं नहीं बनतीं। उन मुद्दों पर दुविधा या दो राय की संभावना नहीं रहती। आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर हो रहे हमले की ही बात करें, तो हर भारतीय इसका विरोध करेगा। स्टारों को भी ऐसे मुद्दों पर बोलने में दिक्कत नहीं होती। हमारे फिल्म स्टार किसी विवादास्पद मुद्दे पर अपनी राय नहीं रखते। राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, यहां तक कि इंडस्ट्री की समस्याओं पर भी अपनी बात कहने से वे हिचकते हैं। करीबी संपर्क होने पर अगर वे कुछ कहें भी, तो तुरंत यह बताना नहीं भूलते कि भाई, यहां ऑफ द रिकॉर्ड बोल रहा हूं। उनकी इसी सोच के कारण यह धारणा बन गई है कि बगैर स्वार्थ के वे कुछ नहीं बोलते।
ताजा संदर्भ में गौर करें, तो बिग-बी ने क्वींस्लैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से मिल रही डॉक्टरेट की मानद उपाधि लेने से इनकार किया है। यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर ने उनकी भावनाओं की कद्र करते हुए दोहराया कि अभी नहीं, तो भविष्य में वे इस उपाधि को ग्रहण करें, क्योंकि इससे दोनों देशों के संबंध मजबूत होंगे। गौर करें, तो बिग-बी अपनी लोकप्रियता के कारण देश के ऐसे प्रतिनिधि हो गए हैं कि दूसरे देशों में भी लोग जानते-पहचानते हैं। उन्हें ऐसी उपाधियां देकर संस्थान, समूह और देश अमिताभ बच्चन के प्रशंसकों को संतुष्ट करते हैं। भारतवंशियों और आप्रवासियों को गर्व का अहसास होता है कि उनके देश के एक कलाकार को सम्मान मिल रहा है। यहीं अमिताभ बच्चन की अस्वीकृति और असहमति महत्वपूर्ण हो जाती है। उनकी अस्वीकृति ने आस्ट्रेलिया और भारत को जागरूक किया। हमें अपने फिल्म कलाकारों की इस भावना पर गर्व करने के साथ उन्हें अपना समर्थन भी देना चाहिए।





4 comments:
aas paas itana swarth faila pada hai ki hum kisi bhi vyakti ke "niswarth- kaarya " ko sahq ki najaron se dekhte hain .
fir bhi agar hum sach me niswarth bhaav se kaam kar rahe hain to hame in baaton par dhayaan diye bina apne nischal path par badhte rahna chaiye , aisa main sochti hoon .
haan un sabhi sakhsiyaton ka abhaar jinhone doosaron ke dukh me apna dukh dekha ,mahsoos kiya.
To,
Ajay ji.
I agree.
It was Quite a decent response Amitabh Bachchan gave to the Australian University. Made a great impression on their minds.
Similarly people from within the film industry ought to have a right to comment on the happenings around them, across the layers of society. They do a job like any other profession so their feelings as a citizen of India must have a bearable space.
Its an edge they possess over the other professions that people follow them whatever they promote because of their popularity.
Nobody even from the government took a concrete stand on the issue of attacks on the Indian diaspora in Australia other than Mr. Bachchan. It was followed by many other responses from the likes of Aamir Khan and Madhur Bhandarkar.
This has to happen no matter what a few think of it.
We must start seeing every thing without the lense of biasness.
Wrong is always wrong and right will always be right..
By the way Ajay ji how was your trip ? Enjoyed IIFA ? Share Some Stories if have any.
What do you think about Shiney Aahuja case ? should it be talked about or be left alone ?
Thanks.
gajendra Singh Bhati
bilkul sahee kahaa aapne hame nisvaarth kaa shaayad arth hee bhool gayaa hai har baat ko svaarth ki nazar se hee dekhte hain ab jesee nazar rakhenge vahi to nazar aayegaa bahut badiyaa likhaa hai aapane aabhaar
अजय जी, आपने सारी स्थिति का बहुत बेबाक विश्लेषण किया है. बधाई. हमारे सितारे जो भी अच्छा काम करें, उसका समर्थन किया ही जाना चाहिए. लेकिन, इसका यह अर्थ भी नहीं कि उनके अच्छे काम की सराहना भी बिना उनके विगत व्यवहार को देखे कर दी जाए. अमिताभ के सन्दर्भ में मुझे यही लगता है कि अपने देश में ही कुछ लोगों के ऐसे व्यवहार पर तो वे मौन साध लेते रहे हैं (मेरा इशारा समझ गये होंगे), लेकिन एक दूर देश में हो रहे घटनाक्रम पर ऐसा क़दम उठाते हैं. क्या इसे उनकी चालाकी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए?
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