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Thursday, February 26, 2009

एक तस्वीर:दिल्ली ६,अभिषेक बच्चन और...

इस तस्वीर के बारे में आप की टिप्पणी,राय,विचार,प्रतिक्रिया का स्वागत है.यह तस्वीर पीवीआर,जुहू,मुंबई में २२ फरवरी को एक खास अवसर पर ली गई है.बीच में घड़ी के साथ मैं हूँ आप सभी का अजय ब्रह्मात्मज.



8 comments:

ashvinbhatt said...

Hame bhi milna hai......

Agli baar kab milwa rahe ho????

Anonymous said...

आप अभिषेक के साथ है, खुशी की बात है. आपकी मुस्कुराहट सब कुछ कह देती है.:)

लेकिन कभी जाली के बीच लिखे दिल्ली-6 नाम पर नज़र डालियेगा, ये आपको अंग्रेजी में मिलेगा, उर्दू में भी मिल जायेगा, लेकिन कभी नक्काशी के बीच इस नाम को देवनागरी हिन्दी में खोजने की कोशिश कीजियेगा.

मैंने भी की, लेकिन ये हर जगह उर्दू और अंग्रेजी में ही मिले.

राजीव जैन Rajeev Jain said...

bahut badia

आर. अनुराधा said...

मैंने दिल्ली-6 फिल्म बड़े पर्दे पर देखी है और जितना याद आता है, नक्काशी में फिल्म का नाम हिंदी में भी है। वैसे, यहां भाषा का मसला उठाने का कोई मतलब समझ में नहीं आता। एक माहौल बनाने, एक काल-स्थान को प्रतीकों के जरिए जाहिर करने की बात है, बस।

अगर आप विदेशी फिल्में देखना पसंद करते हैं और स्टीफन स्पीलबर्ग (जुरासिक पार्क वाले) की 'अमिस्ताद'देखी हो तो याद करें, उसमें शुरुआत के कोई 15 मिनट तक अफ्रीका के आदिवासियों की भाषा में ही विचार-विमर्ष चलता है, जिसके सब-टाइटल्स तक नहीं दिए गए हैं। क्योंकि वहां भाषा के शब्दों को समझना उतना महत्वपूर्ण नहीं है।

स्लमडॉग मिलियनेयर को ही लें, इंग्लैंड की, इंग्लिश फिल्म में करीब आधी बातचीत, गाली आदि हिंदी-मुंबइया हिंदी में है, जिसको समझने और पुरस्कार के लिए चुनने में हॉलीवुडी ज्यूरी को कोई दिक्कत नहीं हुई!

mamta said...

फोटो तो बढ़िया लगी ।

कल ही हमने delhi 6 देखी है । और पसंद भी आई ।

Anonymous said...

आप तो अमर हो गए जनाब....

Anonymous said...

फिल्म के टाइटिल में नाम हिन्दी में देना बाध्यता है,
मैं खंभों पर लगे पोस्टरों के विज्ञापन की बात कर रहा हुं. इनमें अंग्रेजी और उर्दू के विज्ञापन है लेकिन हिन्दी में कतई नहीं है,

स्पीलवर्ग की किस अंग्रेजी पिक्चर के पोस्टर अंग्रेजी में नहीं है? स्लमडॉग मिलियोनेर केर अंग्रेजी संस्करण के पोस्टर क्या अंग्रेजी में नहीं हैं? फिर हिन्दी भाषा के नाम पर अपने पेट में निवाले गटकने वाले इन फिल्म निर्माताओं को हिन्दी से परहेज क्यों? कौन से कारण है जो इनकी हिन्दी फिल्म के नाम अंग्रेजी और उर्दू में देने पर मज़बूर करते हैं?

vinitutpal said...

badhai