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Saturday, December 27, 2008

फ़िल्म समीक्षा:गजनी

आम दर्शकों की फिल्म
-अजय ब्रह्मात्मज

फिल्म रिलीज होने से पहले आमिर खान ने कहा था, लंबे समय के बाद मैं एक्शन थ्रिलर कर रहा हूं। इस फिल्म के जरिए मेरी कोशिश है कि आम दर्शकों का मनोरंजन करूं। वह अपने उद्देश्य में सफल हुए हैं। गजनी आम दर्शकों को पसंद आ रही है। यह हिंदी फिल्मों की मुख्यधारा की परंपरा की फिल्म है, जिसमें तर्क पर संयोग हावी रहता है। आप फिल्म में कार्य-कारण संबंध खोजने लगे तो निराश होंगे। इस फिल्म का आनंद सिर्फ देखने में है। संजय सिंहानिया (आमिर खान) अपनी पे्रमिका को गुंडों से बचा नहीं पाया है। वह खुद भी गजनी (प्रदीप रावत) के गुस्से का शिकार होता है। इस हमले की वजह से वह स्मृति विलोप का रोगी हो जाता है। उसकी स्मृति का क्रम 15 मिनट से ज्यादा देर तक नहीं बना रहता। इस लिए वह अपने शरीर पर लिखे काम, नाम व नंबर, तस्वीर और कार्ड के जरिए घटनाओं और लक्ष्य को याद रखता है। अभी उसका एकमात्र लक्ष्य गजनी तक पहुंचना और उसे मारना है। उसकी सामान्य जिंदगी में लौटने पर हम पाते हैं कि वह एक सामान्य व्यक्ति था। जाने-अनजाने वह एक साधारण माडल कल्पना (असिन) से प्रेम करने लगता है। वह अपनी वास्तविकता जाहिर नहीं करता। उसने तय किया है कि अपने प्रेम की स्वीकृति के बाद वह सच बताएगा। लेकिन इससे पहले ही उसकी जिंदगी बिखर जाती है। वह गजनी को मारने में कामयाब तो होता है, लेकिन काफी मुश्किलों के बाद।
तमिल में बनी मूल फिल्म से हिंदी गजनी की कहानी अलग है। भाव वही है, भावाभिव्यक्ति बदल गई है। अंतिम दृश्यों की घटनाएं भी बदल दी गई हैं। इस फिल्म का नाम खलनायक को दे दिया गया है। खलनायक के नाम से बनी चंद फिल्मों में एक होगी गजनी। आमिर ने एक्शन थ्रिलर के तौर पर इसका जोरदार प्रचार किया, लेकिन फिल्म के आधे हिस्से में रोमांस है। रोमांस जैसी कोमल भावना में अपना शरीर सौष्ठव दिखाते हुए आमिर अच्छे लगते हैं।
आमिर ने फिल्म के लिए एट पैक एब्स बनाए थे। फिल्म में उसका उचित उपयोग हुआ है। अपने दो-तिहाई दृश्यों में आमिर खान संवादों के बजाए संकेतों और भावों से खुद को व्यक्त करते हैं। उन्होंने संजय सिंहानिया के कोमल और आक्रामक दोनों ही पहलुओं को बारीकी से निभाया है। तमिल फिल्मों की अभिनेत्री असिन की यह पहली हिंदी फिल्म है। आमिर जैसे धुरंधर अभिनेता के सामने उन्होंने स्वाभाविक अभिनय किया है। सौंदर्य प्रतियोगिताओं और मॉडलिंग से आई अभिनेत्रियों के इस दौर में असिन माधुरी दीक्षित और काजोल की परंपरा से जुड़ती हैं। गजनी आम दर्शकों की निम्नतम रुचि का खयाल रख कर बनाई गई है। यह श्रेष्ठ और उत्तम फिल्म नहीं है, लेकिन मनोरंजक है। सिनेमा के व्यापक दर्शक समूह को यह संतुष्ट करती है।

3 comments:

सुजाता said...

बस अभी ही देख कर आ रही हूँ , आपसे सहमत हूँ।

महेन said...

अभी तक देखने का संयोग नहीं बन पाया। हाँ मूल अंग्रेज़ी फ़िल्म मोमेन्टो देखने की कोशिश की थी मगर थोड़ी देर बाद ही ऊब गया।

Abhishek said...

गनीमत है की किसी ने आम दर्शकों के नज़रिए से फ़िल्म देखी, वरना 'प्रबुद्ध' ब्लॉगर जगत के लिए तो गजनी जलते कोयले के समान है॥
मैंने भी फ़िल्म देखी और मुझे तो बड़ा मज़ा आया। आपसे पूरी तरह सहमत हूँ।