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Saturday, November 15, 2008

फ़िल्म समीक्षा:दोस्ताना


भारतीय परिवेश की कहानी नहीं है

-अजय ब्रह्मात्मज


कल हो न हो में कांता बेन के मजाक की लोकप्रियता को करण जौहर ने गंभीरता से ले लिया है। अबकि उन्होंने इस मजाक को ही फिल्म की कहानी बना दिया।
दोस्ताना दो दोस्तों की कहानी है, जो किराए के मकान के लिए खुद को समलैंगिक घोषित कर देते हैं। उन्हें इस झूठ के नतीजे भी भुगतने पड़ते हैं। संबंधों की इस विषम स्थिति-परिस्थिति में फिल्म के हास्य दृश्य रचे गए हैं। आशचर्य नहीं की इसे शहरों के युवा दर्शक पसंद करें। देश के स्वस्थ्य मंत्री ने भी सुझाव दिया है कि समलैंगिक संबंधों को कानूनी स्वीकृति मिल जानी चाहिए। सम्भव है कि कारन कि अगली फ़िल्म समलैंगिक संबंधो पर हो।

करण की दूसरी फिल्मों की तरह इस फिल्म की शूटिंग भी विदेश में हुई है। इस बार अमेरिका का मियामी शहर है। वहां भारतीय मूल के दो युवकों को मकान नहीं मिल पा रहा है। एक मकान मिलता भी है तो मकान मालकिन अपनी भतीजी की सुरक्षा के लिए उसे लड़कों को किराए पर नहीं देना चाहती। मकान लेने के लिए दोनों खुद को समलैंगिक घोषित कर देते हैं। फिल्म को देखते समय याद रखना होगा कि यह भारतीय परिवेश की कहानी नहीं है। यह एक ऐसे देश की कहानी है, जहां का कानून समलैंगिक दंपति को रेसिडेंट परमिट देने में प्राथमिकता देता है। भारत में समलैंगिक संबंधों को अभी सामाजिकस्वीकृति नहीं मिली है।

हास्य फिल्मों में हमेशा अप्राकृतिक विषयों और कमियों को मजाक का विषय बनाया जाता है.समलैंगिकता पर बनी यह फ़िल्म ऐसे संबंधों के प्रति संवेदनशील होने के बजाय हंसाने कि वजह देती है.हिन्दी फिल्मों के इतिहास में यह फ़िल्म पुरूष अंग प्रदर्शन के लिए याद रखी जायेगी। निर्देशक तरूण मनसुखानी ने जॉन अब्राहम की सुडौल देहयष्टि का जमकर प्रदर्शन किया है। जॉन अब्राहम अपनी देह को लेकर बेफिक्र दिखते हैं। उन्हें कुछ दृश्यों में चड्ढी खिसकाने में शर्म नहीं आई है। इस देह दर्शन का उद्देश्य निश्चित रूप से वैसे दर्शकों को रिझाना है,जो पुरुषों के शरीर सौष्ठव में रूचि लेते हैं.यह हिन्दी का बदलता सिनेमा है.इस पर गौर करने की ज़रूरत है।

अभिनय के लिहाज से अभिषेक और जॉन अब्राहम ने अपने किरदारों को सहजता से निभाया है। दोनों के बीच के सामंजस्य से फ़िल्म रोचक बनी रहती है। अभिषेक बच्चन खिलंदडे किरदारों में अच्छे लगते हैं.जॉन अब्राहम भी इस बार किरदार में घुसते नज़र आए.प्रियंका चोपड़ा अभिनय के प्रति गंभीर हो गई हैं। फैशन के बाद दोस्ताना में भी वह जंचती है। इस फिल्म में बॉबी देओल सरप्राइज करते हैं। बाकी कलाकार सामान्य हैं।

1 comment:

Neelima said...

हमने तो नियम बना लिया है आपके ब्लॉग पर रिकमेंडिड फिल्में ही देखते हैं !इस समीक्षा के लिए धन्यवाद !