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Sunday, November 2, 2008

प्रेम और विवाह दुर्लभ संबंध है: सोनू सूद -ईशा कोप्पिकर



पंजाब के छोटे से शहर मोगा के सोनू सूद और एक विवाह ऐसा भी के भोपाल के प्रेम में समानताएं देखी जा सकती हैं। सोनू मोगा से एक्टर बनने निकले और प्रेम सिंगर बनने निकलता है। छोटे शहरों से आए युवकों को महानगरों में आने के बाद एहसास होता है कि अपने बड़े सपनों के लिए वे छोटे हैं। फिर भी छोटे शहरों में रिश्तों की जो अहमियत है, वह बड़े शहरों में नहीं है।
ईशा कोप्पिकर मुंबई में पली-बढ़ी हैं। डाक्टर के परिवार से आई ईशा कोप्पिकर आज भी मध्यवर्गी मूल्यों में यकीन करती हैं। उनकी सोच और योजनाओं में उसकी झलक मिलती है। प्रेम, विवाह और समर्पण को वह बहुत जरूरी मानती हैं। उनके घर में हमेशा परस्पर प्रेम को तरजीह दी गयी है। ईशा एक विवाह ऐसा भी में चांदनी के रूप में प्रेम और वैवाहिक संबंधों को प्राथमिकता देती है।
प्रेम के बारे में आपकी क्या धारणा है?
सोनू सूद: प्रेम के बिना जिंदगी मुमकिन नहीं है। मां-बाप के प्रेम से हमारी जिंदगी जुड़ी होती है। आप को ऐसा लगता है कि अपने प्रियजनों के लिए कुछ करें। एक विवाह ऐसा भी में प्रेम को नए ढंग से चित्रित किया गया है। सुख में तो हम साथ रहते ही हैं। दुख में साथ रहें तो प्रेम का मर्म समझ में आता है।
ईशा कोप्पिकर: प्रेम मेरे लिए आशा है। प्रेम जीवन के लिए बहुत जरूरी है। यह हमारे लिए प्रकृति से मिला बहुत बड़ा आर्शीवाद है। मैं उन्हें बहुत खुशकिस्मत मानती हूं, जिन्हें अपना प्रेम मिलता है। मैं ऐसे लोगों की इज्जत करती हूं जो प्यार को मानते हैं।
प्रेम और पैसे का क्या संबंध है?
सोनू सूद: पैसा जरूरी है और संबंधों में थोड़ी आसानी आ जाती है। जिंदगी में सुविधाएं आ जाती हैं। महानगरों में शोहरत और पैसा ज्यादा महत्वपूर्ण मान लिया जाता है। इसमें प्रेम कहीं पीछे रह जाता है। मुझे ऐसा लगता है कि प्रेम मिल जाए तो शोहरत, पैसा और नाम भी मिल जाता है। मैंने महसूस किया है कि जिंदगी के लक्ष्यों को पाने की भागदौड़ में प्रेम कई बार पीछे रह जाता है।
ईशा कोप्पिकर: पैसा भी जरूरी है और मुझे लगता है कि समान डिग्री में प्रेम मुश्किल से होता है। कभी एक ज्यादा प्रेम करता है तो कभी दूसरा। कई बार जिंदगी की जरूरतें प्यार के आगे आ जाती हैं। मैं उन्हें भी गलत नहीं मानती। हम इस दुनिया में जी रहे हैं तो बाकी चीजें भी देखनी पड़ती हैं।
एक विवाह ऐसा भी के चांदनी और प्रेम जैसा रिश्ता मुमकिन है क्या?
सोनू सूद: बिल्कुल मुमकिन है। सूरज बड़जात्या और कौशिक घटक ने जिस आत्मविश्वास से इस फिल्म को पेश किया है, उससे लगता है कि प्रेम में बारह साल का इंतजार कोई लंबा समय नहीं है। यह आम बात नहीं हो सकती, लेकिन ऐसा प्रेम समाज में मौजूद है। ऐसे रिश्ते ही जिंदगी के प्रति आस्थावान बनाते हैं।
ईशा कोप्पिकर: उनका संबंध अत्यंत पावन है। वे एक-दूसरे की परवाह करते हैं। उनके बीच प्रेम है। दोनों दोस्त हैं और दोनों को एक-दूसरे पर भरोसा है। फिल्म में मैं चांदनी बनी हूं। चांदनी के हर कार्य में प्रेम उसका समर्थन करता है। ऐसा संबंध दुर्लभ है, लेकिन सबसे बड़ी बात है कि प्रेम इस संबंध से खुश है।
लिव इन रिलेशनशिप के बारे में क्या कहेंगे?
सोनू सूद: मैं उसे गलत नहीं मानता। दो व्यक्ति एक-दूसरे के साथ रहने का फैसला करते हैं। उनके बीच भी प्रेम होता है। इस सोच को गलत नहीं कह सकते। छोटे शहरों में इस तरह के रिलेशनशिप नहीं के बराबर हैं। वहां तो कई बार शादी में अनबन होने के बाद भी रिश्ते निभाए जाते हैं।
ईशा कोप्पिकर: अगर कोई इस तरह के रिश्ते में खुश है तो उसकी मर्जी। अगर प्रेम है तो सारे रिश्ते ठीक है।
विवाह संस्था में कितना यकीन करते हैं?
सोनू सूद: मैं इसे बहुत जरूरी मानता हूं। हालांकि रोज रिश्ते टूटते दिख रहे हैं। तलाक हो रहे हैं, लेकिन आज भी ज्यादा तादाद शादीशुदा लोगों की है। विवाह दो व्यक्तियों के बीच का ऐसा रिश्ता है, जो दोनों की जिंदगी को मजबूत बनाता है और समाज को आगे बढ़ाता है।
ईशा कोप्पिकर: विवाह बहुत जरूरी है। वह हमारी जिंदगी को एक दूसरे स्तर पर ले जाता है। इन दिनों ऐसा लग रहा है कि यह बेमानी हो गया है, लेकिन मेरा मानना है कि विवाह के बगैर समाज बिखर जाएगा। मैं इस संस्था में यकीन करती हूं। प्यार करना तो ठीक है, लेकिन उसे निभाना बहुत महत्वपूर्ण है। विवाह से प्रेम स्थायी हो जाता है।
प्रेम, विवाह और आपसी संबंध के प्रति हमारा रवैया बदल गया है क्या?
सोनू सूद: हां, बदला है। रोज अखबारों में ऐसी खबरें आ रही हैं। सर्वेक्षण बताते हैं। अब इस मामले में ज्यादा अफसोस और दुख भी वहीं व्यक्त किया जाता। मुझे लगता है कि यह बदलाव अच्छा नहीं है। हो यह रहा है कि निजी खुशी के लिए हम दूसरों की इच्छाओं की परवाह नहीं करते। ऐसा होना नहीं चाहिए।
ईशा कोप्पिकर: निश्चित ही पश्चिमी सभ्यता हमारी सभ्यता को प्रभावित कर रही है। उसके प्रभाव में हम विवाह के प्रति अधिक गंभीरता नहीं दिखाते। संबंधों की परवाह नहीं करते। अहं की अहमियत बढ़ गयी है। मेरा मानना है कि जब तक आप सुनिश्चित नहीं हैं परस्पर संबंध के प्रति, तब तक शादी न करें। एक बार शादी करने के बाद उसे निभाना बहुत जरूरी है। शादी टूटने का सबसे बुरा असर बच्चों पर पड़ता है।
आपने प्रेम किया है?
सोनू सूद: हां, मैं ने प्रेम किया और प्रेम विवाह भी किया है।
ईशा कोप्पिकर: हां, मैंने प्रेम किया है। मेरा प्रेम दस सालों तक चला। उसके बाद कुछ समस्याएं हो गई। फिर मुझे लगा कि अगर हम एक-दूसरे को तकलीफ दे रहे हैं तो अलग हो जाएं। इन दिनों मैं किसी और से प्रेम कर रही हूं। वे बड़े अच्छे इंसान हैं। मैं उनकी बहुत इज्जत करती हूं और बहुत प्यार भी करती हूं। अभी नहीं मालूम कि शादी कब करूंगी, लेकिन इतना तय है कि शादी करूंगी। मेरे प्रेमी ने देखा कि मेरी मेहनत अब रंग ला रही है तो उन्होंने भी इसे थोड़ा आगे खिसका दिया है।

1 comment:

Dr. Vijay Tiwari "Kislay" said...

आलेख पढ़ कर अच्छा लगा

- विजय तिवारी ' किसलय '
जबलपुर