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Thursday, November 13, 2008

दरअसल:दीवाली पर हुए बॉक्स ऑफिस धमाके

-अजय ब्रह्मात्मज
इस साल दीवाली के मौके पर रिलीज हुई गोलमाल रिट‌र्न्स और फैशन का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन अच्छा रहा। दोनों फिल्मों को लेकर ट्रेड सर्किल में पहले से ही पॉजिटिव बातें चल रही थीं। कहा जा रहा था कि रिलीज के दिन गोलमाल रिट‌र्न्स का पलड़ा भारी होता दिखा। उसका कलेक्शन ज्यादा हुआ। फैशन भी बहुत पीछे नहीं रही। दोनों फिल्मों के धमाकों से बॉक्स ऑफिस पर छाई खामोशी टूटी है। हालांकि आने वाले हफ्तों में ही यह पता चलेगा कि दोनों की वास्तविक कमाई कितनी रही!
अगर सिर्फ लाभ के नजरिए से देखें, तो गोलमाल रिट‌र्न्स सभी के लिए फायदेमंद साबित होती दिख रही है। निर्माता, वितरक और प्रदर्शक सभी को फायदा हो रहा है। फिल्म बिजनेस में अब नए व्यापारी आ गए हैं। इरोज और इंडियन फिल्म्स जैसी कॉरपोरेट कंपनियां फिल्म निर्माण में शामिल नहीं होतीं। वे फिल्में पूरी होने के बाद खरीद लेती हैं। ऐसे में निर्माता भी एकमुश्त रकम पाने के बाद संतुष्ट हो जाता है। उसे फिल्म के चलने या न चलने की फिक्र ही नहीं सताती। गोलमाल रिट‌र्न्स और सिंह इज किंग के उदाहरण से इसे समझा जा सकता है। दोनों फिल्में पूरी होने के बाद इंडियन फिल्म्स ने खरीदी और उन्हें अपनी शर्तोपर रिलीज किया। सिंह इज किंग का जबरदस्त प्रचार होने के कारण उसके प्रति दर्शकों के बीच भारी उत्सुकता थी। इंडियन फिल्म्स ने उसे देखते हुए वितरकों से मीनिमम गारंटी में निश्चित रकम लेने के बाद फिल्म दे दी। इस तरह से रिलीज के पहले ही इंडियन फिल्म्स ने फिल्म की लागत से अधिक रकम एकत्रित कर खुद को सुरक्षित कर लिया। रिलीज होने के बाद सिंह इज किंग भी कामयाब कहलाई, लेकिन उतनी नहीं, जितनी रिलीज के पहले हाइप और प्रचार की वजह से लग रही थी। नतीजा यह हुआ कि मीनिमम गारंटी के रूप में भारी रकम दे चुके वितरकों को नुकसान हुआ।
गोलमाल रिट‌र्न्स में मामला उल्टा हो गया है। इस बार पिछले अनुभव से सबक लेकर वितरकों ने मीनिमम गारंटी नहीं दी। उन्होंने दूसरे समीकरणों के तहत फिल्म रिलीज की। इस बार वितरक फायदे में हैं। गोलमाल रिट‌र्न्स को जिस कीमत में इंडियन फिल्म्स ने खरीदा है, उस रकम को जुटाना और फिर मुनाफे की तरफ जाने में अभी कई अड़चनें हैं। फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन पहले ही हफ्ते में 35 करोड़ से अधिक बताया जा रहा है, लेकिन सच तो यह है कि इसमें वितरकों और प्रदर्शकों के मुनाफे भी शामिल हैं। इंडियन फिल्म्स का मुनाफा तो फिल्म के सौ करोड़ के बिजनेस के बाद ही होगा। फिल्म व्यापार में कॉरपोरेट कंपनियों के आने के बाद से मुनाफा, लाभ और निवेश का आकलन बिल्कुल बदल गया है। सिर्फ बॉक्स ऑफिस कलेक्शन ही मुनाफे का आधार नहीं रह गया है। हां, उस कलेक्शन से आय के दूसरे स्रोत प्रभावित जरूर होते हैं। इसी वजह से निर्माता चाहता है कि फिल्म सप्ताहांत में अच्छा बिजनेस करे और फिल्म के हिट होने की खबर फैल जाए। दीवाली के दो धमाकों के बाद राजश्री की एक विवाह ऐसा भी बिल्कुल अलग रणनीति के साथ रिलीज की गई। वैसे, राजश्री की रणनीति के नतीजे कुछ दिनों में ही सामने आ जाएंगे। इस हफ्ते रिलीज हो रही दोस्ताना को लेकर भी काफी उम्मीदें हैं। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री दीवाली की कामयाबी के बाद खुश नजर आ रही है। अगले दो महीनों में बिजनेस सुधरता नजर आ रहा है। खासकर दिसंबर में रिलीज हो रही शाहरुख खान की रब ने बना दी जोड़ी और आमिर खान की गजनी पर सारी उम्मीदें टिकी हैं, क्योंकि दोनों ही फिल्मों को अभी से हिट माना जा रहा है। रब ने बना दी जोड़ी आदित्य चोपड़ा की फिल्म है। वे मोहब्बतें के छह साल बाद शाहरुख के साथ लौट रहे हैं। उन्होंने इस बार साधारण प्रेम कहानी ली है। दूसरी तरफ गजनी तमिल में बन चुकी गजनी की रिमेक है, जिसके लिए आमिर ने खास मेहनत की है। ट्रेड सर्किल में इसे दोनों खानों के वर्चस्व की लड़ाई के रूप में भी देखा जा रहा है। किसका पलड़ा भारी रहेगा, यह कहना मुश्किल है! वैसे, पिछले साल शाहरुख और आमिर दोनों की फिल्मों ने कामयाबी हासिल की थी। कुछ लोग तो यही उम्मीद कर रहे हैं कि दोनों फिर कामयाब हों और फिल्म इंडस्ट्री को भी आगे बढ़ाएं।

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