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Tuesday, February 12, 2008

मान्यता की माँग में सिन्दूर

मान्यता की माँग में सिन्दूर देख कर कई लोगों को हैरत हो रही होगी.दुबई से मुम्बई आई एक सामान्य सी लड़की की आंखों में कई सपने रहे होंगे.इन सपनों को बुनने में हमारी हिन्दी फिल्मों ने ताना-बाना का काम किया होगा.तभी तो वह मुम्बई आने के बाद फिल्मों में पाँव टिकने की कोशिश करती रही.उसे कभी कोई बड़ा ऑफर नहीं मिला.हाँ,प्रकाश झा ने उसे 'गंगाजल'में एक आइटम गीत करने का मौका दिया।
मान्यता ने वहाँ से संजय की संगिनी बनने तक का सफर अपनी जिद्द से तय किया।

गौर करें कि यह किसी भी सामान्य लड़की का सपना हो सकता है कि वह देश के सबसे चर्चित और विवादास्पद फिल्म ऐक्टर की की संगिनी बने.चवन्नी बार-बार संगिनी शब्द का ही इस्तेमाल कर रहा है.इसकी भी ठोस वजह है.अभी मान्यता को पत्नी कहना ठीक नहीं होगा.संजय दत्त के इस भावनात्मक उफान के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता.कल को वे किसी और के साथ भी नज़र आ सकते हैं.दोनों की शादी का मकसद सिर्फ साथ रहना है.दोनों दो सालों से साथ रह ही रहे थे.दवाब में आकर संजय ने भावनात्मक उद्रेक में शादी की बात मान ली।

चवन्नी इसे मान्यता के दृष्टिकोण से बड़ी उपलब्धि के तौर पर देख रहा है.जिस लड़की का आइटम गीत भी लोगों ने नज़रंदाज कर दिया था.आज वह देश के सभी अख़बारों के प्रथम पेज कि खबर.हर अखबार में उसकी तस्वीर छपी है.क्या उसने सोच-समझकर इस रिश्ते की पहल की होगी?कहते लड़कियां भवन में फैसले नहीं लेतीं.वे पहले फिसला लेटी हैं,और फिर भावनाओं में फँस जाती हैं।

मान्यता और संजय की दोस्ती और रिश्तों की बात करें तो संजय के एक निर्माता दोस्त ने बाबा से मनु की मुलाक़ात करवाई थी.ऐसी मुलाकातें आम है.संजय जैसे ऐक्टर की ज़िंदगी में आई ऐसी लड़कियों की गिनती नहीं की जाती.लेकिन पहली मुलाक़ात में ही कुछ ऐसा टंका भिड़ा कि मान्यता संजय के करीब आती गयी और संजय के पुराने दोस्त छूटते गए.यहाँ तक कि परिवार में भी मान्यता का पद और कद बढ़ता गया.वह संजय की बहनों प्रिय और नम्रता की नाखुशी के बावजूद संजय दत्त की हमसफ़र बनी रही।

मान्यता ने सब कुछ हासिल किया.यह संजय की तीसरी शादी है तो मान्यता की चौथी शादी है.मान्यता ने आज सब कुछ हासिल कर लिया है.उसकी यह यात्रा किसी परिकथा की तरह ही है.हाँ,किसी दिन वह बताये तो रोचक कहानी सुनने को मिलेगी.

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