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Saturday, February 2, 2008

हाय रामा, क्या है ड्रामा

-अजय ब्रह्मात्मज

लगता है इस फिल्म की सारी क्रिएटिविटी शीर्षक गीत में ही खप गई है। अदनान सामी के गाए गीत में शब्दों से अच्छा खेला गया है। सुनने में भी अच्छा लगता है। इस गीत के चित्रांकन में फिल्म के सारे कलाकार दिखे हैं, लेकिन शुरू के क्रेडिट के समय ही यह गाना खत्म हो जाता है। उसके बाद फिल्म आरंभ होती है, तो फिर उसके खत्म होने का इंतजार शुरू हो जाता है।

रामा रामा क्या है ड्रामा में निर्देशक एस चंद्रकांत ने कामेडी क्रिएट करने की असफल कोशिश की है। अमूमन स्फुट विचार को लेकर बनाई गई फिल्मों का यही हश्र होता है। अधूरी कहानी और आधे-अधूरे किरदारों को लेकर फिल्म पूरी कर दी जाती है। इस फिल्म में निर्देशक एक संदेश देना चाहते हैं कि बीवी का जिंदगी में खास महत्व होता है और सफल दांपत्य के लिए पति-पत्नी को थोड़ा बहुत एडजस्ट करना चाहिए।

फिल्म का सारा भार राजपाल यादव के कंधों पर है और उनके कंधे इस फिल्म को ढो नहीं पाते। बाकी कलाकारों का उन्हें लापरवाह सहयोग मिला है। हां, फिल्म में अंग्रेजी के गलत शब्दों का इस्तेमाल करते हुए मिसरा जी (संजय मिश्रा) आते हैं तो राजपाल यादव के साथ उनकी जोड़ी जमती है। अनुपम खेर, नेहा धूपिया, अमृता अरोड़ा और आशीष चौधरी अधपके किरदारों को अपने अभिनय से और भी कच्चा कर देते हैं।

रामा रामा क्या है ड्रामा कामेडी की विधा में कमजोर कोशिश है और फिर कहानी का निर्वाह पुरुषों के दृष्टिकोण से किया गया है, जिसमें बीवी को ही तमाम परीक्षाओं से गुजर कर पूर्ण साबित होना है। पुरुष किरदारों की कमियों के लिए उन्हें ही कसूरवार समझा गया है। आखिरकार जब वे घरेलू औरत और सेविका की भूमिका के लिए तैयार हो जाती हैं तो फिल्म खत्म हो जाती है।

चवन्नी की सलाह:न देखें

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