जोधा अकबर की रिलीज में अभी दो हफ्ते की देर है.एक विवाद छेड़ा गया है कि अकबर के साथ जिसकी शादी हुई थी, उस राजपूत राजकुमारी का नाम जोधा बाई नहीं था.एक जाति विशेष के संगठन ने आपत्ति की है और आह्वान किया है कि राजस्थान में इस फिल्म को नहीं चलने देंगे.हो सकता है कि वे अपने मकसद में कामयाब भी हो जाएँ,क्योंकि जब भी किसी फिल्म पर इस तरह की सुपर सेंसरशिप लगी है तो सरकार पंगु साबित हुई है।
सवाल है कि अगर राज परिवार के वंशजों को इस नाम पर आपत्ति नहीं है तो बाकी लोगों को इस नाम के उपयोग से गुरेज क्यों है?क्या यह सिर्फ आत्मप्रचार के लिए छेड़ा गया विवाद है?अगर आपत्ति करने वाले जोधा के नाम नाम को लेकर गंभीर हैं तो उन्हें पहले मुगलेआज़म पर सवाल उठाना चाहिए.१९६० में बनी इस फिल्म ने भारतीय मानस में जोधा और अकबर की ऐसी छवि बिठा दी है कि आशुतोष गोवारिकर के अकबर बने रितिक रोशन और जोधा बनी ऐश्वर्या राय को दिक्कत हो रही है।
अपने देश में फिल्मों के साथ विवादों का सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है.कोई भी कहीं से उठता है और अपनी उंगली दिखा देता है.बाकी लोग भी उसे देखने कगते हैं और फिल्मकार की सालों की मेहनत एकबारगी कठघरे में आ जाती है।
चवन्नी इस स्थिति को सही नहीं मानता.
1 comment:
चवन्नी की तरह इस देश की अधिकांश जनता शायद इस विवाद को नहीं मानती है लेकिन इतिहासकारों की माने तो जोधाबाई अकबर के बेटे की पत्नी थीख् ना कि अकबर की, खैर जोधाबाई को भी नहीं पता होगा कि पांच सौ साल बाद इतना बवाल उसके नाम पर मचेगा
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