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Friday, July 27, 2007

६० साल की ५० फ़िल्में

१. आवारा राज कपूर२.आराधना शक्ति समन्त३.अंदाज़ महबूब खन४.एक दूजे के लिए क बलचन्देर५.गंगा यमुना नितिन बोसे६.गरम हवा म एस सथ्यु७.हकीकत चेतन अनन्द८.नमखालाल प्रकाश मेह्र९.प्यासा गुरुदत्त१०.नया दौर ब र चोप्र११.सत्य राम गोपाल वेर्म१२.शोलय रमेश सिप्प्य१३.ब्लैक फ्रिदय अनुराग कश्यप१४.दो बीघा ज़मीन बिमल रोय१५.दो आंखें बारह हाथ व शन्तरम१६.मेरा गों मेरा देश राज खोस्ल१७.लगान आशुतोष गोवरिकर१८.जाने भी दो यारो कुंदन शह१९.ग़दर अनिल शर्म२०.मैने प्यार किया सूरज बर्जत्य२१.मुघ्लेअज़ाम क असिफ़२२.मधुमती बिमल रोय२३.मुन्नाभाई म्ब्ब्स राज कुमार हिरनि२४.पकीज़ाह कमल अम्रोहि२५.परिंदा विधु विनोद चोप्र२६.बॉर्डर जे प दत्त२७.बोब्ब्य राज कपूर२८.वक़्त यश चोप्र२९.पिंजर चंद्र प्रकाश द्विवेदि३०.मकबूल विनोद भर्द्वज३१.मदर इंडिया महबूब खन३२.कागज़ के फूल गुरुदत्त३३.आंधी गुल्ज़र३४.बूट पोलिश प्रकाश अरोर३५.गाइड विजय अनन्द३६.अमर अकबर अन्थोंय मनमोहन देसै३७.अल्बेर्ट पिंटो को गुस्सक्यों आता है साइड मिर्ज़३८.कलयुग श्याम बेनेगल३९.अंकुर श्याम बेनेगल४०.मिर्च मसाला केतन मेह्त४१.अर्ध सत्य गोविन्द निह्लनि४२.घ्यल राज कुमार सन्तोशि४३.अर्थ महेश भत्त४४,सारांश महेश भत्त४५.चुपके चुपके हृषिकेश मुखेर्जी४६.पडोसन ज्योति स्वरूप४७.शक्ति रमेश सिप्प्य४८.उपकार मनोज कुमर४९.उम्रू जान मुज़ाफ्फर अलि५०.चमेली सुधीर मिश्र५१.देवदास बिमल रोय५२.मर इंडिया शेखर कपूर५३.दीवार यश चोप्र५४.बैजू बावरा विजत भत्त५५.बैंडिट कुईं शेखर कपूर५६.बाज़ार सागर सर्हदि५७.मृत्युदंड प्रकाश झ५८.तीसरी क़सम बासु भत्तचर्य५९.दिलवाले दुल्हनिया लेजयेंगे आदित्य चोप्र६०.गांधी रिचर्ड अत्तेंबरौघ

Wednesday, July 25, 2007

क्या आप देबू को जानते हैं ?

KYA AAP DEBU KO JANTE HAIN?DEBU…DIBYENDU BHATTACHARYA.NSD GRADUATE OF 1997 BATCH.MONSOON WEDDING KA LOTTERY…DIVYA DRISHTI KA JIVAN SAWANT..URF PROFFESOR KA AUTO DRIVER…AB TAK CHAPPAN KA NAZRUL…BLACK FRIDAY KA YEDA YAKUB…JITNI FILMEN,UTNE NAAM.THODA PEECHE CHALEN.10 SAAL HO GAYE.JAB DEBU KE BATCH KE SAARE STUDENTS MUMBAI KI TARAF MUKHATIB HO RAHE THE TO DEBU NE REPARTORY JOIN KAR LIYA.DELHI MEIN PLAYS KIYE AUR KAFI IZZAT AUR SHOHRAT BATORI.IS DARMYAAN DEBU KE BATCH KA RAJPAL YADAV SERIAL KE RASTE FILMON MEIN AAYA AUR USNE APNI EK JAGAH BANA LI.DEBU ACCEPT NAHI KAREGA,LEKIN KAHIN NA KAHIN RAJPAL KI KAAMYABI NE DEBU KO MUMBAI BULA LIYA.IN FACT,EK HI BATCH MEIN DONO THE AUR DEBU APNE BATCHMATE KI TULNA MEIN AWWAL ARTIST MANA JATA THA.TO YEAR 2000 MEIN DEBU MUMBAI AA GAYA.NSD KE TAMAM TALENTED ARTIST KI TARAH DEBU NE BHI STRUGGLE AARAMBH KIYA.PRODUCERS KE OFFICES KE CHAKKAR,DIRECTORS SE MILNA AUR KHUD KE LIYE KAAM KHOJNA.MIJAJ AUR TALENT SE DEBU EXTRAS YA CROWD KA HISSA BAN NAHI SAKTA THA.WOH SAHI MAUKE KI TALASH MEIN THA AUR AAJ BHI HAI.USKI AANKHO MEIN GAJAB KI CHAMAK HAI,JO CAMERA ON HOTE HI ROSHAN HO JAATI HAI.MAHESH BHATT NE PAHLI MULAQAT MEIN HI USE BATAYA THA KI TUMHARI AANKHE HI TUMHARA ASSET HAIN.TUMHARE ANDAR RAJNIKANT JAISI INTENSITY HAI.KOSHISH KARO,KAAMYABI MILEGI.VIKRAM BHATT NE AITBAAR MEIN MAUKA DIYA AUR JOHN ABRAHAM KA DOST BANA DIYA.TAB JOHN ACTING KI ABCD SEEKH RAHE THE.EK INTERVIEW MEIN JOHN NE MUJH SE DEBU KI TARIF KI AUR KAHA KI WOH BAHUT TALENTED HAI.VIKRAM BHATT USE APNI FILMON MEIN CHHOTE ROLE DETE RAHE AUR KAHTE RAHE KI EK DIN TUMHARE LAYAK ROLE DOONGA.WOH DIN ABHI NAHI AAYA HAI.FILM INDUSTRY MEIN BADI KAAMYABI KA EK HI FORMULA HAI KI AAP KI EK FILM HIT HO JAAYE AUR USME AAP KA ROLE NOTICE HO.DEBU AAJ BHI US KAAMYAABI KE INTEZAAR MEIN HAI.LEKIN WOH EK RATTI BHI HARA YA TOOTA NAHI HAI.ANURAG KASHYAP KA WOH CHAHETA ACTOR HAI.ANURAG KI DEV D KA WOH CHUNNI LAL HAI.USE AAMIR KHAN PASAND KARTE HAIN.WOH MANGAL BOYS MEIN SE EK THA.USNE AAMIR KI SANGAT SE SEEKHA KI FOCUSSED RAHO AUR APNE IRAADON KO LEKAR DETERMINE RAHO.USNE MADHU KI COMEBACK FILM KABHI SOCHA BHI NA THA MEIN MAIN LEAD KIYA HAI.VIVEK AGNIHOTRI KI GOAL MEIN USKA MAJOR ROLE HAI.GOAL KI SHOOTING MEIN ARSAD WARSI DOST BAN GAYE,KYONKI DEBU EK BEHATAREEN ACTOR AUR ACHCHHA SAATHI HAI SHOOTING KE BAAD BHI.MAIN DEBU KI MUSKARAHAT KE PEECHE CHIPE DARD KO DEKH KAR KAI BAAR SAHAM JAATA HOON.EK ARTIST KO AISE ROLE NAHI MIL RAHE KI WOH KHUD KO SABIT KAR SAKE.DEBU AKEYLA NAHI HAI…USKE AUR BHI HAMSAFAR HAIN.SAB TALENT AUR HUNAR SE CHALCHALA RAHE HAIN,LEKIN MUMBAI KI HINDI FILM INDUSTRY UNHE KHULI BAHON SE NAHI BULA RAHI HAI.EK RESISTANCE HAI…EK DHAKKA SAARE NAYE ARTIST MAHSOOS KARTE HAIN …KI KOI UNHE BAHAR DHAKEL RAHA HAI.KYA KAMI HAI UN MEIN?KAMI HAI KI CHHOTE SHAHRON,DOOSRE SHAHRON AUR MUMABI KE BAHAR SE AAYE IN TALENTED LADKON KI AANKHO MEIN DEHKTI TAMNNAYE HAIN…INDUSTRY KE KHURRRAT LOGON KO DAR LAGTA HAI KI YE AA GAYE AUR CHA GAYE TO HAMARE BACHCHON KA KYA HOGA?DEBU SIRF EK NAAM NAHI HAI.DEBU UN SABHI KA REPRESENTATIVE HAI,JO FILM INDUSTRY KE DARWAZE PAR JORDAAR DASTAK DE RAHE AUR JAB TAK UNHE BHEETAR AANE AUR BAITHNE KI JAGAH NAHI DI JAAYEGI,TAB TAK WOH SAB NAHI HATENGE.HAAR MAN LENE KA TO SAWAL HI NAHI UTHATA.IN PAR MEDIA KI NAZAR BHI NAHI HAI.KYONKI WOH SAB ABHI SALEBLE COMMODITY NAHI BANE HAIN.MEDIA KE LOG INKE KHWABON KA MAJAK UDAATE HAIN AUR SAMPARK BHI BANAYE RAKHTE HAIN.MALOOM NAHI KAB KAUN CHAMAK UTHE AUR PHIR TARJEEH NA DE.KYA AAP DEBU SE MILE HAIM?ZAROORI NAHI KI USKA NAAM DIBYENDU BHATTACHARYA HI HO.WOH KOI BHI HO SAKTA HAI..SANJAY,DIPAK,SUSHIL,PANKAJ,RICHA,SEEMA,GITA,JAYA KUCH BHI HO SAKTA HAI.

पार्टनर का रिव्यू

रोमांस कम, मस्ती ज्यादा और वह भी अल्हड़पन से लबरेज। 'पार्टनर' में डेविड धवन ने अपने परंपरागत फार्मूले में थोड़ा बदलाव किया है। उनकी इस नयी फिल्म में द्विअर्थी संवाद नहीं हैं। हो सकता है कि उन्होंने अपनी आलोचनाओं का ख्याल रखा हो। फिल्म में हीरो-हीरोइन से अधिक दोनों हीरो की जोड़ी जमती है। जैसे ही सलमान खान और गोविंदा एक साथ पर्दे पर आते हैं तो हंसी के फव्वारे फूटने लगते हैं।
'पार्टनर' विशुद्ध कॉमिक फिल्म है। लव गुरु यानी माडर्न कामदेव प्रेम (सलमान खान) लड़कों को प्यार करने के गुर सिखाता है। वह प्यार के टिप्स देते समय यह ख्याल जरूर रखता है कि कोई सिर्फ अय्य ाशी के लिए उससे लड़की पटाने के गुर न सीखे ले। भास्कर (गोविंदा) उसके लिए चुनौती है, क्योंकि उसे अपनी कंपनी की मालकिन प्रिया (कैटरीना कैफ) से ही प्रेम हो गया है। शुरू में प्रेम उसका तिरस्कार करता है, लेकिन बाद में तंग आकर कुछ टिप्स देता है। भास्कर अपनी मालकिन को प्रभावित कर लेता है। उधर दूसरों को प्यार का प्रशिक्षण देने वाला प्रेम खुद नैना (लारा दत्ता) को पसंद करता है, लेकिन उसे शादी के लिए राजी नहीं कर पाता। आखिरकार दोनों ही सफल होते हैं, लेकिन इस बीच कई नाच-गाने और हंसी-मस्ती के लगातार खूब प्रसंग आते हैं। डेविड धवन ने एक बार कहा था कि कॉमेडी फिल्मों की बंधी-बंधाई स्क्रिप्ट नहीं होती। शूटिंग के लोकेशन, स्टार्स के मूड और सिचुएशन से सीन इम्प्रूव किये जाते हैं। 'पार्टनर' देखते हुए साफ लगता है कि गोविंदा और सलमान खान की निजी भागीदारी से सीन लिखे और बढ़ाए गए हैं। वापसी के बाद तीसरी फिल्म 'पार्टनर' में गोविंदा अपने फुल फार्म में नजर आए हैं। अपनी उपस्थिति मात्र से दर्शकों को आकर्षित करने में माहिर सलमान खान के लिए कई दृश्यों में गोविंदा मुश्किलें खड़ी कर देते हैं। सलमान खान में सहज आकर्षण है तो गोविंदा सहज अभिनय के उदाहरण हैं। नृत्य में अपने थुलथुल शरीर के बावजूद हृष्ट-पुष्ट सलमान खान से कहीं भी नीचे या कमजोर नहीं दिखते गोविंदा। गोविंदा के नृत्य में भी अभिनय की छटा दिखती है। गोविंदा के पहले किशोर कुमार इस हुनर के उस्ताद कहे जा सकते हैं। हीरोइनों में लारा दत्ता निखार पर हैं। वह लगातार दर्शकों के करीब आ रही हैं। इस फिल्म में कैटरीना की जगह और कोई अभिनेत्री रहती तो फिल्म ज्यादा इंटरेस्टिंग बन जाती। चारों मुख्य कलाकारों में कैटरीना कैफ कमजोर कड़ी हैं। कामेडी फिल्मों में अभिनय के साथ संवाद अदायगी का भी कमाल रहता है। अगर आपको भाषा ही नहीं आती हो तो लड़खड़ाना स्वाभाविक है। फिल्म की कहानी से छोटा डॉन (राजपाल यादव) के ट्रैक का कोई संबंध नहीं है, लेकिन वह जब भी आते हैं, अपनी अदाओं से हंसाते हैं। अपने गहन आत्मविश्वास से राजपाल यादव दर्शकों को लुभाते हैं। फिल्म का गीत-संगीत मस्ती और जोश से भरपूर है। हीरोइनों से ज्यादा दोनों हीरो नाच-गाने से दर्शकों का मन बहलाते हैं। वैसे भी सलमान खान और गोविंदा नाच रहे हैं तो किसी और पर नजर नहीं टिकती। शुद्ध मनोरंजन के लिए यह फिल्म देखने जाएं और हर प्रकार के लॉजिक सिनेमाघर के बाहर ही छोड़ दें।

Monday, July 23, 2007

नकाब का रिव्यू

हमें इस गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए कि पॉपुलर अभिनेताओं और सफल निर्देशक की हर फिल्म औसत से बेहतर होगी। अब्बास-मस्तान आम दर्शकों की रुचि के हिसाब से एवरेज फिल्में बनाते रहे हैं। उन्हें थ्रिलर फिल्मों का कामयाब निर्देशक माना जाता है, लेकिन 'नकाब' में निर्देशक दर्शकों तक अपनी बात पहुंचाने में बुरी तरह असफल रहे।
कहानी सोफी (उर्वशी शर्मा), विक्की (अक्षय खन्ना) और करण (बॉबी देओल) की है। यह एक अनोखा प्रेम त्रिकोण है, जिसमें सोफी पाला बदलती रहती है। करण का एक दूसरा चेहरा भी है राहुल। कहानी रोचक और समझ में आने लायक तरीके से आगे बढ़ती है, लेकिन करण की नकली आत्म हत्या के बाद कहानी के तार ऐसे उलझते हैं कि हम बार-बार क्यों॥क्यों सवाल करते हैं और हमें किरदारों के बदलते रवैए का कारण समझ में नहीं आता। रहस्यात्मक और थ्रिलर कहानियों में जब रहस्य खुलता है, तो सब कुछ स्पष्ट हो जाता है। 'नकाब' में अंत तक पता ही नहीं चलता कि किरदारों के संबंध क्यों और कैसे बदल रहे हैं? इसके अलावा, हिंदी फिल्मों और भारतीय कथा परंपरा में कभी खल चरित्रों को विजयी होता नहीं दिखाया जाता, 'नकाब' में हत्यारे छूट निकलते हैं। यह 21वीं सदी का बॉलीवुड सिनेमा है। इस फिल्म की एकमात्र उपलब्धि उर्वशी शर्मा है। पहली फिल्म में भी उनका आत्मविश्वास झलकता है। सोफी के द्वंद्व और दुविधा को वह एक हद तक निभा ले जाती हैं। आधुनिक हीरोइनों के लिए जरूरी नृत्य और अन्य अदाओं में भी वह उपयुक्त लगती हैं। बॉबी देओल और अक्षय खन्ना अपने-अपने किरदारों को सफाई से अदा कर देते हैं। उनके लिए कोई चुनौती थी भी नहीं।
अमूमन अब्बास-मस्तान की फिल्मों का संगीत मधुर और लोकरुचि का होता है। म्यूजिक कंपनी टिप्स की फिल्म होने के बावजूद 'नकाब' का संगीत साधारण है। प्रीतम का संगीत 'मेट्रो' में बहुत लोकप्रिय हुआ था, लेकिन 'नकाब' के चालू संगीत में वे निराश करते हैं। क्या रमेश तौरानी कानसेन (सुनकर संगीत समझने वाले) नहीं रहे? 'नकाब' निर्देशक अब्बास-मस्तान की कमजोर और लचर फिल्म है।

सोनू निगम/सुभाष के झा

आज YEH TO HONA HI THA.MEDIA KO LIKHE SONU NIGAM KE KHULE PATRA KE BAAD HUI SUBHASH K JHA KI FAJIHAT KE BAAD MEDIA KE LOGON KA EK SWAR MEIN YAHI KAHNA HAI KI ‘YEH TO HONA HI THA.’MEDIA AUR FILM BIRADARI KA RISHTA DOSTI SE JYADA EK-DOOSRE KO SHOW DOWN KARNE KA HO GAYA HAI.MEDIA MEIN KAI JOURNLIST IS GHALATFAHMI MEIN RAHTE AUR JEETE HAIN KI WOH STARS KA CAREER BANATE AUR BIGADTE HAIN.DOOSRI TARAF STARS MEDIA PERSONS KO NEECHI NAZAR SE DEKHTE HAIN AUR MAANTE HAIN KI MEDIA UNKE RAHAM-O-KARAM SE ZINDA HAI.KUCH APVAAD HAIN,JO HAR FIELD MEIN HOTE HAIN.JO HUA…AAGE JO HOGA…USKE LIYE MAINSTREAM MEDIA MEIN CHAL RAHE FILM JOURNALISM AUR USKO BADHAWA DE RAHE FILM PERSONALITIES HI JIMMEDAAR HAIN.AAJKAL NEWSPAPERS AUR MAGAZINES MEIN FILMS AUR USKE CONTENTS AND CRAFTS KE ALAWA BAKI SAARI BAATEN HOTI HAIN.IN DINON SIRF REVIEWS MEIN FILMS KI BAATEN RAHTI HAIN.ENGLISH FILM JOURNALISM KE NATURE AUR US PAR FILM STARS KI MAYOPIC DEPAENDENCE KI WAJAH SE HI SUBHASH KA JHA JAISE PATRAKAAR TAQATWAR HO JAATE HAIN.AFSOS KI BAAT HAI KI BADE FILM STARS UNHE HI QUOTES DETE HAI.FILM STARS NE LANGUAGE JOURNLISM SE TAUBA KAR LI HAI.MJBOORI NA HO TO STARS HINDI,MAARATHI,GUJRATI LANGUAGE KE JOURNALISTS SE MILNA BHI PASAND NAHI KARTE.FOR EXAMPLE,SRK AUR KARAN JOHAR KO HINDI WALON SE KHAS PARHEJ HAI.IN DINO KISI BHI ENGLISH NEWSPAPERS KE FILM COVERAGE KO DEKH LEN.HAR JAGAH STARS AUR UNKI GAIRFILMI BAATEN HAIN.ISKA ASAR ITNA KHATARNAAK AUR BADA HAI KI USE HI BENCHMARK SAMAJH KAR LANGUAGE JOURNALISTS KO BAKWAAS WRITING KE LIYE MAJBOOR KIYA JA RHA HAI.BAZAR ISKE SAMARTHAN MEIN HAI,KYONKI USE STARS KE JARIYE LIFE STYLES AUR PHIR APNE CONSUMER PRODUCTS BECHNE HAIN.BAHAS HO SAKTI HAI KI KYA SONU NIGAM KE OPEN LETTER PAR ITNI BAAT HONI CHAHIYE THI YA SUBHASH K JHA KO KATHGHARE MEIN KHADA KARNA KAHAN TAK UCHIT HAI?STARS KO APNE GIREBAAN MEIN BHI JHANKNA CHAHIYE.FILM JOURNALISM KO CORRUPT KARNE MEIN BIG STARS KE VESTED INTERESTS RAHE HAIN.SABHI JAANTE HAIN KI KAISE ANURAG KASHYAP JAISE YOUNG FILMMAKER KO GIRANE KI MUHIM CHALAYI JAATI HAI.KAISE OMKARA KO GIRAYA JATA HAI.MEDIA PERSONS JYADATAR ISTEMAAL HOTE HAIN AUR KUCH MEDIA PERSONS FILM STARS KA ISTEMAAL KARTE HAIN….KABHI…KABHI…pfc JASE PLATEFORM ITNE KAM HAIN KI FILMS SE RELATED SAARI BAATCHEET NAHI HO PATI.SONU NIGAM AUR SUBHASH K JHA KE PRASANG MEIN HAMEN YEH BHI SOCHNA CHAHIYE KI FILM PERSONALITIES KI KYA RESPONSBILITIES HAI AUR MEDIA PERSONS KI KYA LIMIT HONI CHAHIYE.KYA PRIVATE HAI AUR KYA PUBLIC? IS PAR BHI BAHAS HONI CHAHIYE.CHALTA HAI…HOTA HAI…KYA FARQ PADTA HAI…AAISE ATTITUDES SE HAM IS HALAT MEIN HAIN.AUR NAHI…BAS AUR NAHI.

Friday, July 6, 2007

कौन हैं ये दीवाने दर्शक?

main PATNA mein hoon.last friday ke pahle se pareshan tha ki is baar review kaise likhoonga.maloom nahi friday ki teenon filmen PATNA mein release hongi ki nahi.aajkal PATNA ke jyadatar cinemagharon mein BHOJPURI filmen hi dikhayi jaati hain.main TIMES OF INDIA dekhta hoon.usmein kisi bhi film ki koi jaankari nahi hai.shayad angrezi akhbaar mein bhojpuri aur hindi filmon ke vigyapan bhi shaan ghatate hon.baharhaal,HINDUSTAN aur DAINIK JAGRAN dekhta hoon.BHOJPURI filmon ke vigyapnon ke beech friday ko release ho rahi teeno filmon ke chhote-chhote vigyapan hain.AAP KA SUROOR sbah 8 baje se dikhyi ja rahi hai.mujhe lagta hai ki distributor ka man rakhne ke liye thetre ne film laga to di hai,lekin darshkon ki naumeedi mein subah se shows rakh diye hain.bhala PATNA mein subah 8 baje film dekhne kaun aayega.ichchha to hoti hai ki main bhi subah 8 ka hi show dekhoon,lekin is dar se nahi jata hoon ki kahin audience ke na aane se show cancel na ho jaaye.main 10 baje ke show ke liye jata hoon.PATNA ke mitra aur film sameekshak VINOD ANUPAM se baat hoti hai.woh bhi saath rahenge,lekin last moment mein unka programme cancle ho jata hai.PATNA ke mashhoor GANDHI MAIDAN ke paas 3 thetre hain.MONA,ELPHISTON aur REGENT.AAP KA SUROOR inme se ek REGENT mein lagi hai.REGENT thetre sadak se thoda andar jaakar hai.muhane se hi bhid nazar aati hai.main box office khoj raha hoon,PATNA mein ise ticket counter aur window bhi kahte hain.window band hai aur uske saamne kareeb 25-30 young ladke khade hain.DC,BC aur STALL sabhi windows par ek jaisi bhid hai.ticket milna mushkil hai.VINOD ne bataya tha ki black mein ticket mil jayega.main blackier ko khojta hoon.lungi aur baniyan pahne moonchon wala ek pahlwan kism ka aadmi BC 70 mein aur DC 80 mein chilla raha hai.main windows ki taraf dekhta hoon.BC 30 aur DC 40 likha hai.main blackier se DC ka ticket lekar poochta hoon KAHE BHAIYA BLACK MEIN ETNA JADA PAISA KAHE LE RAHE HAIN? woh ek baar meri tarf dekhta hai aur kahta hai isme snakes(snacks) bhi hai na.woh ticket deta hai,jo kisi lottery ticket ki tarah lagta hai.main us par tareekh aur show ka samay aur seat no dekhta hoon.8 baje ka show abhi khatm nahi hua hai.thodi der hai show chaloo hone mein.bahar darshkon ka rela badhta ja raha hai.lohe ke mote-mote grill lage hain.log kataron mein khaden hain.kaise log kahte hain ki BIHARI niyam-kanoon nahi jante?main bhi khada ho jata hoon.poori katar mein meri umra ka koi nahi hai.14 se 20 saal ke ladke hain.lagbhag 25% ladkon ne topi pahan rakhi hai.ye ladke zaroor HIMESH RESHMIYA ke fans hain.gate khulte hi main katar ke saath andar pahunch jata hoon.DC ka mark dekhte hur seedhiyan chadhta hoon aur aise hi ek seat par baith jata hoon.sach kahoon main apna seat no nahi padh paya tha.film shuru ho chuki hai,darshak andar aa rahe hain.sabhi apni seat par jaane ki hadbadi main hai.ek ladka mera ticket dekh kar mujhe apni seat tak le jata hai.pahla gana ASALAM WALE KUM shuru ho gaya hai aur poora hall ga rahai.himesh ki awaz dab gayi hai.HIMESH ka chehra dekhte hi ek saath seetiyan bajti hain.maine aisi hi deewngi SIVAJI-THE BOSS mein dekhi thi.mumbai ke ek multiplex mein tamil audience kae saath SIVAJI-THE BOSS dekhte hue mera critical maind so gaya tha.yahn bhi waisa asar ho raha hai.KAUN HAIN YE DEEWANE DARSHAK?main samajh nahi pa raha hoon ki himesh ka ais asara kaise hua hoga?PATNA ke semilitrate darshkon ko HR ke baare mein kaise maloom hua hoga?mujhe ehsaas hota hai ki AAP KA SUROOR hit ho sakti hai.main PTNA ke young darshkon ke saath film ka anand leta hoon.is sadharan film ko dekhte hue sochta hoon ki kya aise darshkon ke baare mein film critic kabhi sochte hain? hall poora bhara hai aur sabh khush hain.aisa lagta hai ki poora hall ek community ban gayi hai aur wo community ek saath film ka anand le rahi hai.bade shahron mein ham film dekhte samay apne reaction mein loud nahi hote.ham khul kar hanste bhi nahi.PATNA ke yeh darshak poori masti mein hain.film ka suroor unke upar tari hai.main film dekhne ke baad usi suroor mein review likhta hoon.mumbai phone karta hoon.ek dost se poochta hoon ki teenon filmen kaisa business kar rahi hain.pata chalta hai ki HIMESH RESHMIYA ki film ne sabhi ko peeche chod diya hai.main chakit hoon ki kya poore desh ke darshak ek tarah se react karte hain?phir hamare trade analyst aur critic kyon desi darshkon ko nazarandaz karte hain?